जालंधर, 25 जुलाई
केंद्रीय मंत्रिपरिषद से रवनीत सिंह बिट्टू के इस्तीफे ने पंजाब की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार में फिलहाल पंजाब का कोई प्रतिनिधि मंत्री नहीं रह गया है। राजनीतिक जानकार इस घटनाक्रम को वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की नई रणनीति का अहम हिस्सा मान रहे हैं।
रवनीत सिंह बिट्टू रेल तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री के रूप में कार्यरत थे। उनका राज्यसभा कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो गया था, लेकिन भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार वह सांसद न रहते हुए भी 21 दिसंबर 2026 तक मंत्री बने रह सकते थे, बावजूद इसके उन्होंने निर्धारित अवधि से पहले ही मंत्री पद छोड़ने का फैसला किया।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भाजपा अब बिट्टू को पंजाब में अपने प्रमुख चुनावी चेहरे के रूप में स्थापित करने की तैयारी में है। स्वयं बिट्टू भी संकेत दे चुके हैं कि अब उनका पूरा ध्यान पंजाब की राजनीति पर रहेगा और वह आगामी विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बेअंत सिंह के पोते होने के कारण भाजपा उन्हें राज्य में अपने प्रमुख जाट सिख चेहरे के रूप में आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले बिट्टू ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर पंजाब की लंबित रेलवे आधारभूत ढांचा परियोजनाओं को शीघ्र पूरा कराने की मांग की थी। ऐसे में उनके पद छोड़ने के बाद इन परियोजनाओं के समन्वय और भविष्य की दिशा पर भी राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।
माना जा रहा है कि मंत्री पद से मुक्त होने के बाद बिट्टू अब आम आदमी पार्टी सरकार और कांग्रेस के खिलाफ अधिक आक्रामक राजनीतिक अभियान चलाएंगे। हाल के महीनों में वह कानून-व्यवस्था, नशे के कारोबार और अकाल तख्त से जुड़े मुद्दों को लेकर भगवंत मान सरकार पर लगातार हमलावर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब वह पूरी तरह पंजाब की राजनीति पर फोकस करते हुए भाजपा के प्रमुख प्रचारक और चुनावी रणनीतिकार की भूमिका निभा सकते हैं।
विश्लेषकों के अनुसार यह इस्तीफा केवल मंत्री पद छोड़ने का निर्णय नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर भाजपा की व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बिट्टू के इस्तीफे के बाद मोदी मंत्रिपरिषद में पंजाब का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो गया है। वहीं भाजपा हाल ही में तरुण चुघ को राज्यसभा भेज चुकी है। ऐसे में भविष्य में मंत्रिपरिषद के विस्तार या फेरबदल के दौरान पंजाब से किसी नए चेहरे को शामिल किए जाने की संभावनाओं को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।