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दिल्ली में प्रदर्शन के बीच बदली सुरक्षा रणनीति, आखिर क्यों हटाए गए पैलेट गन और इलेक्ट्रिक शॉक उपकरण?

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Published On: July 25, 2026

नई दिल्ली, 25 जुलाई

राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर जारी छात्रों के प्रदर्शन के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की विशेष इकाई रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने फिलहाल पैलेट गन, दंगारोधी गन, बिजली का झटका देने वाले उपकरण और इलेक्ट्रिक शील्ड के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। आरएएफ की महानिरीक्षक (आईजी) ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि दिल्ली की मौजूदा परिस्थितियों का आकलन करने के बाद यह फैसला लिया गया है और अगले आदेश तक इन उपकरणों का उपयोग नहीं किया जाएगा।

आईजी की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि दिल्ली में तैनात आरएएफ कर्मियों को ये उपकरण जारी नहीं किए जाएंगे और उच्च स्तर से मिले आदेशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए। इसी बीच राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने के लिए सीआरपीएफ और आरएएफ की 16 अतिरिक्त कंपनियों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है। इससे पहले दिल्ली में अर्धसैनिक बलों की 45 कंपनियां पहले से ही तैनात हैं।

सूत्रों के अनुसार प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग को लेकर अब सुरक्षा एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्रवाई करेंगी। बताया जा रहा है कि भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान हथियारों के इस्तेमाल में नाटो प्रोटोकॉल के अनुरूप दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है, जब हाल में हुए ‘संसद मार्च’ के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग को लेकर संयुक्त राष्ट्र में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में मानवाधिकार उल्लंघन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

दिल्ली पुलिस और आरएएफ की कार्रवाई को लेकर छात्रों और विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। शुक्रवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर हमला बोलते हुए एक प्रदर्शनकारी को मीडिया के सामने पेश किया, जिसके शरीर पर कथित तौर पर पैलेट गन के छर्रों के निशान बताए गए।

सीआरपीएफ के सेवानिवृत्त अतिरिक्त महानिदेशक एस.एस. संधू, जिन्होंने आरएएफ में डीआईजी और कार्यवाहक आईजी के रूप में भी सेवाएं दी हैं, का कहना है कि कई अंतरराष्ट्रीय संधियों और मानकों में पैलेट गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध या गंभीर आपत्तियां दर्ज हैं। उनका दावा है कि इसके बावजूद दिल्ली में छात्रों पर ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किए जाने के आरोप सामने आए हैं।

इस बीच केंद्रीय सुरक्षा बलों की अतिरिक्त कंपनियां बुलाए जाने को भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में प्रदर्शन का दायरा बढ़ने और अन्य राज्यों से भी छात्रों तथा विभिन्न संगठनों के समर्थन मिलने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है। किसान संगठनों सहित कई समूहों ने भी छात्रों के समर्थन में दिल्ली पहुंचने की घोषणा की है। संसद का सत्र जारी होने के कारण भी सुरक्षा एजेंसियां कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं। इसी क्रम में हिंडन एयरपोर्ट पर 16 अतिरिक्त कंपनियां पहुंच रही हैं, जिनमें 10 कंपनियां सीआरपीएफ और छह कंपनियां आरएएफ की शामिल हैं।

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