नई दिल्ली, 27 जुलाई
नीट पेपर लीक आंदोलन के दौरान चर्चा में आई व्यंग्यात्मक पहल ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बाद अब सोशल मीडिया पर एक नया अभियान ‘E20 जनता पार्टी’ तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। यह ऑनलाइन अभियान सरकार से मांग कर रहा है कि देश के पेट्रोल पंपों पर E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल के साथ-साथ 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का ईंधन चुनने की स्वतंत्रता मिल सके।
बताया जा रहा है कि यह अभियान मलेशिया आधारित एक एक्स (X) अकाउंट से संचालित हो रहा है। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य एथेनॉल मिश्रित ईंधन का विरोध करना नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं के पास विकल्प उपलब्ध न होने के मुद्दे को उठाना है। उनका तर्क है कि वाहन मालिकों को यह अधिकार होना चाहिए कि वे अपनी गाड़ी के लिए कौन-सा ईंधन चुनना चाहते हैं।
अभियान के तहत सरकार के सामने कई मांगें रखी गई हैं। इनमें 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल की बिक्री दोबारा शुरू करना, सभी पेट्रोल पंपों पर ईंधन की स्पष्ट लेबलिंग सुनिश्चित करना, E20 के माइलेज, इंजन प्रदर्शन और रखरखाव लागत से जुड़े अध्ययन सार्वजनिक करना तथा इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर स्वतंत्र वैज्ञानिक शोध कराना शामिल है।
यह अभियान उसी व्यंग्यात्मक और सोशल मीडिया केंद्रित शैली में चलाया जा रहा है, जिसने नीट पेपर लीक आंदोलन के दौरान ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया था। अभियान को उस समय और अधिक चर्चा मिली जब दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने E20 जनता पार्टी की एक पोस्ट को रीपोस्ट किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई।
सोशल मीडिया पर इस अभियान को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स का कहना है कि सरकार भविष्य में बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध तो करा सकती है, लेकिन उसकी कीमत अधिक रखी जा सकती है। उनका मानना है कि ऐसी स्थिति में महंगाई, ईंधन की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को लेकर नई बहस शुरू हो सकती है। वहीं कुछ लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि मलेशिया आधारित एक अकाउंट भारत की ईंधन नीति को लेकर अभियान क्यों चला रहा है।
कुछ अन्य यूजर्स ने अभियान की दलीलों पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि सामान्य विकल्प के रूप में केवल मिश्रित ईंधन उपलब्ध कराया जाए और शुद्ध पेट्रोल के लिए अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़े, तो इसे वास्तविक उपभोक्ता अधिकार नहीं कहा जा सकता।
फिलहाल ‘E20 जनता पार्टी’ का यह अभियान पूरी तरह सोशल मीडिया तक सीमित है, लेकिन इसकी मांगों और इस पर हो रही व्यापक ऑनलाइन बहस ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति, उपभोक्ता अधिकार और ईंधन विकल्प जैसे मुद्दों पर नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।