वॉशिंगटन डीसी, 18 जून
पश्चिम एशिया में पिछले 111 दिनों से जारी तनाव और संघर्ष के समाप्त होने के संकेत मिल रहे हैं। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक व्यापक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता फ्रांस में आयोजित जी7 सम्मेलन के दौरान वर्साय में, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में संपन्न हुआ।
ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस समझौते पर डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षर किए, क्योंकि वह तेहरान में मौजूद थे। दोनों नेताओं द्वारा हस्ताक्षरित यह 14-सूत्रीय समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी और सैन्य तनाव को समाप्त करना बताया जा रहा है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह समझौता क्षेत्र में स्थिरता की ओर एक बड़ा संकेत है। इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापारिक जहाजों के लिए फिर से खोलने पर सहमति बनी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा और तेल आपूर्ति श्रृंखला में सुधार और कीमतों में स्थिरता की उम्मीद जताई जा रही है।
व्हाइट हाउस द्वारा जारी वीडियो में डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हुए देखा गया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते में ओमान सहित कई देशों की मध्यस्थता भी शामिल रही, जबकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है।
समझौते के तहत दोनों देशों ने सभी सैन्य कार्रवाइयों को तत्काल रोकने पर सहमति जताई है, जिसमें लेबनान सहित अन्य क्षेत्र भी शामिल हैं। अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम और व्यापक शांति समझौता तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके अलावा अमेरिका ने नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक गतिविधियों को सुरक्षित बनाने पर सहमति जताई है।
आर्थिक प्रावधानों के तहत ईरान पर लगे प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की बात कही गई है, साथ ही विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियों को वापस करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अमेरिका की ओर से ईरान के आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए लगभग 300 अरब डॉलर के सहयोग कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया है।
परमाणु मुद्दे पर ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियारों का निर्माण नहीं करेगा, जबकि उसके यूरेनियम भंडार की निगरानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी द्वारा की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता दोनों देशों के संबंधों में सुधार की दिशा में एक ढांचा साबित हो सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी इसे सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।