चंडीगढ़, 10 जून
पंजाब यूनिवर्सिटी ने अपने परिसर में पंजाबी भाषा को फिर से प्रमुखता देने का कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने गुरमुखी लिपि में नए साइनबोर्ड और नेमप्लेट लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये बोर्ड जल्द ही विभिन्न विभागों में स्थापित किए जाएंगे और विश्वविद्यालय परिसर में पंजाबी भाषा की उपस्थिति को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करेंगे।
यह निर्णय उस विवाद के बाद आया है, जब छात्र संगठन ‘साथ’ ने विश्वविद्यालय में नए बोर्डों और नेमप्लेटों का विरोध किया था। इन बोर्डों पर हिंदी, अंग्रेजी और ब्रेल लिपि में जानकारी दी गई थी, लेकिन पंजाबी भाषा को शामिल नहीं किया गया था। विरोध स्वरूप छात्रों ने कुछ बोर्डों को नुकसान भी पहुंचाया था।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री आनंदपुर साहिब से सांसद मालविंदर सिंह कंग ने पंजाब के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के चांसलर को पत्र लिखकर साइनबोर्डों पर पंजाबी भाषा को तुरंत बहाल करने की मांग की थी। इसके बाद विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यालय ने पंजाबी साइनबोर्डों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है और नए बोर्ड जल्द ही लगाए जाएंगे।
सांसद कंग ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम पंजाबी भाषा और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इससे यह संदेश जाता है कि पंजाब की पहचान और उसकी मातृभाषा की अनदेखी नहीं की जा सकती। कंग ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि पंजाबी भाषा को बोर्डों से हटाना केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान का अपमान था।
हालांकि इस विवाद के दौरान दिव्यांग छात्रों ने बोर्डों को नुकसान पहुंचाने की कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि उन्हें पंजाबी भाषा के शामिल किए जाने से कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन जिन बोर्डों पर ब्रेल लिपि में जानकारी दी गई थी, उन्हें नुकसान पहुंचाना उचित नहीं था।