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नोएडा में CUET परीक्षा हुई रद्द, घंटों इंतजार के बाद छात्रों का गुस्सा फूटा

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Published On: May 30, 2026

नोएडा, 30 मई

नोएडा सेक्टर-64 स्थित आदर्श परीक्षा केंद्र शनिवार को सीयूईटी (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) परीक्षा के दौरान छात्रों और अभिभावकों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन गया। सुबह से परीक्षा देने पहुंचे सैकड़ों अभ्यर्थियों को तकनीकी खामियों के चलते घंटों इंतजार करना पड़ा, लेकिन परीक्षा शुरू नहीं हो सकी। अंततः परीक्षा रद्द कर दी गई, जिससे छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने केंद्र के बाहर धरना-प्रदर्शन करते हुए एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

छात्रों का आरोप है कि वे सुबह नौ बजे निर्धारित परीक्षा के लिए समय पर पहुंचे थे। लंबी कतारों में खड़े रहने के बाद जब उन्हें परीक्षा कक्ष में प्रवेश मिला, तो वहां भी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ा। अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्हें परीक्षा शुरू होने का इंतजार करते हुए एक से दो घंटे तक कक्ष में ही बैठना पड़ा, जबकि कई कमरों में पंखे तक नहीं चल रहे थे। भीषण गर्मी में लगातार परीक्षा शुरू होने का इंतजार करने के बाद छात्रों को निराशा हाथ लगी और अंत में परीक्षा रद्द कर दी गई।

प्रदर्शन में शामिल अनुज ने बताया कि उनके भाई की परीक्षा सुबह नौ बजे थी। वह सुबह 6:30 बजे उन्हें केंद्र छोड़कर घर लौट आए और दस बजे लेने पहुंचे, लेकिन तब तक कोई छात्र बाहर नहीं आया था। अंदर से लगातार घोषणा की जा रही थी कि तकनीकी कारणों के चलते परीक्षा शुरू नहीं हो पा रही है। अनुज के अनुसार, एक छात्र ने बाहर आकर बताया कि दो घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद परीक्षा शुरू नहीं हुई और छात्रों को बाहर निकलने की अनुमति भी नहीं दी जा रही थी।

छात्रों का कहना है कि वे कई महीनों से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। 12वीं के बाद देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली इस परीक्षा के रद्द होने से उनके भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

केंद्र के बाहर देर तक विरोध-प्रदर्शन चलता रहा। परीक्षा रद्द होने से निराश छात्र और अभिभावक व्यवस्था पर सवाल उठाते नजर आए। उनका कहना था कि यदि तकनीकी व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं थीं, तो परीक्षा आयोजित करने से पहले इसकी जांच की जानी चाहिए थी, ताकि छात्रों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़ता।

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