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आखिर क्यों फिर सोने की ओर लौटे दुनिया के केंद्रीय बैंक? चीन-पोलैंड की खरीद ने बढ़ाई हलचल

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Published On: June 5, 2026

नई दिल्ली, 5 जून

वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितताओं और वित्तीय बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों का भरोसा एक बार फिर सोने पर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मार्च में बड़े पैमाने पर बिकवाली के बाद केंद्रीय बैंक अप्रैल में दोबारा शुद्ध खरीदार बनकर उभरे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने अप्रैल महीने में कुल 17 टन सोने की शुद्ध खरीदारी की, जबकि भारत ने इस दौरान कोई नया सोना नहीं खरीदा।

अप्रैल में सबसे बड़ी खरीदारी पोलैंड के केंद्रीय बैंक ने की। नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड ने अकेले 14 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा, जिससे वह दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार बन गया। वहीं चीन ने भी अपने स्वर्ण भंडार को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 8 टन सोना खरीदा। दिसंबर 2024 के बाद यह चीन की सबसे बड़ी मासिक खरीद मानी जा रही है। लगातार 18 महीनों से सोना खरीद रहे चीन का कुल स्वर्ण भंडार अब बढ़कर 2,322 टन हो गया है।

चेक गणराज्य ने भी अपनी खरीदारी की श्रृंखला जारी रखते हुए लगातार 38वें महीने सोना खरीदा और अपने भंडार में 2 टन की वृद्धि की। इससे यह संकेत मिल रहा है कि कई देश आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच अपने विदेशी मुद्रा भंडार को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए सोने पर भरोसा जता रहे हैं।

दूसरी ओर भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रैल में कोई सोना नहीं खरीदा। वर्ष 2026 में अब तक आरबीआई ने केवल मार्च महीने में 200 किलोग्राम सोने की खरीद की है। हालांकि इससे पहले 2025 में उसने 4.2 टन और 2024 में रिकॉर्ड 72.6 टन सोना खरीदा था। फिलहाल आरबीआई का कुल स्वर्ण भंडार 880.52 टन पर स्थिर बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की लगातार बढ़ती खरीदारी केवल निवेश का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक दीर्घकालिक रणनीतिक सोच भी है। जेपी मॉर्गन के अनुसार चीन अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है ताकि भविष्य में किसी संभावित भू-राजनीतिक संकट, युद्ध या आर्थिक टकराव की स्थिति में अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम से बचा जा सके। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका द्वारा रूस के डॉलर भंडार को फ्रीज किए जाने की घटना ने चीन को इस दिशा में और अधिक सतर्क कर दिया है।

इस बीच रूस ने सोना बेचने का सिलसिला जारी रखा है। अप्रैल में उसने लगातार चौथे महीने 6 टन सोना बेचा और इस वर्ष अब तक कुल 22 टन सोने की बिक्री कर चुका है। वहीं उज्बेकिस्तान ने अप्रैल में 1 टन सोना बेचा, लेकिन वर्ष 2026 में अब तक कुल 24 टन की खरीद के साथ वह पोलैंड के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शुद्ध खरीदार बना हुआ है।

मार्च में सबसे अधिक सोना बेचने वाले तुर्किये ने अप्रैल में अपेक्षाकृत संतुलित रुख अपनाया और उसके स्वर्ण भंडार में कोई बड़ा बदलाव दर्ज नहीं किया गया। इन घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में सोना एक बार फिर केंद्रीय बैंकों के लिए सबसे भरोसेमंद सुरक्षित निवेश के रूप में उभर रहा है।

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