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अमृतसरी कुलचा बनेगा वैश्विक पहचान का प्रतीक, क्या मिलेगा जीआई टैग?

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Published On: June 20, 2026

अमृतसर, 20 जून

दुनियाभर में अपनी खास पहचान बना चुके अमृतसरी कुलचे को अब भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग दिलाने की दिशा में पंजाब सरकार ने औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल का उद्देश्य इस पारंपरिक व्यंजन को कानूनी संरक्षण और वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करना है।

अमृतसर जिला प्रशासनिक परिसर में खाद्य प्रसंस्करण विभाग के विशेष सचिव संदीप हंस की अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई। बैठक में कुलचा निर्माताओं और कारोबारियों को जीआई टैगिंग की प्रक्रिया, उसके लाभ और कानूनी सुरक्षा के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने कहा कि अमृतसरी कुलचा केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि पंजाब की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है, जिसे जीआई टैग मिलने पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान मिलेगी। इसके साथ ही इसके नाम पर किसी भी तरह की नकल या गलत उपयोग पर कानूनी कार्रवाई संभव होगी।

अधिकारियों के अनुसार, देश और विदेशों में अमृतसरी कुलचे की बढ़ती लोकप्रियता के कारण इसकी मौलिकता को संरक्षित करना आवश्यक हो गया है। यह व्यंजन कई अंतरराष्ट्रीय रेस्तरां और होटलों के मेन्यू में भी जगह बना चुका है, जिससे इसकी वैश्विक पहचान और मजबूत हुई है।

इतिहासकारों का मानना है कि ‘कुलचा’ शब्द फारसी भाषा के ‘कुलचेह’ से आया है, जिसका अर्थ खमीरयुक्त गोल रोटी होता है। समय के साथ 18वीं और 19वीं शताब्दी में यह व्यंजन अमृतसर में एक विशिष्ट भरवां और तंदूरी शैली वाले पकवान के रूप में विकसित हुआ, जिसमें फारसी, मुगलई और पंजाबी पाक परंपराओं का अनूठा मेल दिखाई देता है।

इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पंजाब राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद के अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों की एक समन्वय समिति बनाई जा रही है। परिषद की संयुक्त सचिव डॉ. दीपिंदर कौर बख्शी ने कहा कि अमृतसरी कुलचे को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं और यह पहले फुलकारी जैसी पारंपरिक कलाओं की तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल कर सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Act, 1999 के तहत आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस पूरी योजना के तहत कुलचा निर्माताओं के संगठन का गठन, आवश्यक दस्तावेज तैयार करने और आवेदन से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा करने का काम किया जाएगा।

जिला प्रशासन ने अतिरिक्त उपायुक्त (जनरल) को इस परियोजना का नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल अमृतसरी कुलचे की पारंपरिक पहचान को संरक्षित करने के साथ-साथ स्थानीय कारोबारियों के लिए नए अवसर भी पैदा करेगी और इसे वैश्विक मंच पर एक नई ऊंचाई तक पहुंचाएगी।

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