श्रीनगर, 11 जून
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बदलते हालात के बीच इस बार अमरनाथ यात्रा को आतंक की काली छाया से बचाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ड्रोन और लिक्विड बम से हमला किए जाने की आशंका जताई गई है, जिसके मद्देनजर सुरक्षा घेरा और पुख्ता कर दिया गया है। लिक्विड एक्सप्लोसिव डिटेक्टर की संख्या बढ़ाई गई है और ड्रोन व एंटी-ड्रोन सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया गया है।
सेना भी यात्रा मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाने में जुटी हुई है। थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी का उत्तरी कमान का दौरा इसी कड़ी का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और पीएमओ ने सुरक्षा निगरानी बढ़ा दी है, जबकि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। 12 जून को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ उच्चस्तरीय बैठक में भी अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा होने वाली है, जिसमें उपराज्यपाल, सेना और सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
यात्रा मार्ग के वन, पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में जवानों की सुरक्षा पुख्ता कर दी गई है। साथ ही यात्रा में शामिल होने वाले लोगों की निगरानी और एडवांस सुरक्षा जांच भी बढ़ा दी गई है। भंडारे लगाने वालों को चार स्तर की सुरक्षा प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, ताकि यात्रा को सुरक्षित और आतंकमुक्त रूप से संपन्न कराया जा सके।