नई दिल्ली, 29 मई
भारतीय कुश्ती जगत से जुड़ी एक बड़ी कानूनी खबर में सुप्रीम कोर्ट ने स्टार पहलवान Vinesh Phogat को एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दे दी है। शीर्ष अदालत ने भारतीय कुश्ती महासंघ की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने पहले विनेश को ट्रायल्स में शामिल होने की इजाजत दी थी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विनेश फोगाट के देश के लिए योगदान और उनकी उपलब्धियों की सराहना की। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि मामला किसी अन्य खिलाड़ी का होता, तो परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। कोर्ट ने कहा कि विनेश ने देश को गौरवान्वित किया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि देश और खेल की गरिमा सर्वोपरि है। अदालत ने विनेश को संबोधित करते हुए कहा, “आप एक उत्कृष्ट एथलीट रही हैं, लेकिन देश सबसे पहले आता है।”
हालांकि राहत देने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने खेल मामलों में अदालतों के बढ़ते हस्तक्षेप पर गंभीर चिंता भी जताई। कोर्ट ने कहा कि खेल महासंघों के तकनीकी और चयन संबंधी मामलों में बार-बार न्यायिक दखल खेल व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। सुनवाई के दौरान जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह किसी मेडिकल कॉलेज में दाखिले का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों से जुड़ा विषय है, जहां अदालतों के हस्तक्षेप से पूरे कार्यक्रम और चयन प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
इस फैसले के बाद विनेश फोगाट अब एशियन गेम्स 2026 के ट्रायल्स में हिस्सा ले सकेंगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों ने खेल प्रशासन और न्यायिक दखल को लेकर नई बहस भी छेड़ दी है।
नई दिल्ली, 28 मई
भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट की एशियन गेम्स 2026 चयन ट्रायल में एंट्री को लेकर अब कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा विनेश फोगाट को चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दिए जाने के बाद भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अब इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में होने जा रही है, जिस पर पूरे खेल जगत की नजरें टिकी हुई हैं।
जानकारी के मुताबिक जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच WFI की याचिका पर सुनवाई करेगी। महासंघ ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश का विरोध किया है, जिसमें महिला पहलवान विनेश फोगाट को आगामी चयन ट्रायल में शामिल होने की अनुमति दी गई थी।
दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 22 मई को दिए गए अपने आदेश में कहा था कि WFI की चयन नीति पहली नजर में भेदभावपूर्ण दिखाई देती है, क्योंकि उसमें विनेश फोगाट जैसी प्रतिष्ठित खिलाड़ी के लिए किसी विशेष विवेकाधिकार का प्रावधान नहीं रखा गया। अदालत ने यह भी माना कि विनेश फोगाट मातृत्व अवकाश के बाद वापसी कर रही हैं और उन्हें अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिलना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने आदेश दिया था कि 30 और 31 मई 2026 को होने वाले चयन ट्रायल में विनेश फोगाट को हिस्सा लेने दिया जाए। कोर्ट ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ट्रायल की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के निर्देश भी दिए थे। साथ ही कहा गया था कि भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के स्वतंत्र पर्यवेक्षक ट्रायल के दौरान मौजूद रहें।
अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई इस पूरे विवाद का रुख तय कर सकती है। खेल जगत में इस मामले को सिर्फ एक खिलाड़ी की वापसी नहीं, बल्कि चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और खिलाड़ियों के अधिकारों से जुड़े बड़े मुद्दे के तौर पर देखा जा रहा है।
नई दिल्ली, मई 22
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) को कड़ी फटकार लगाते हुए पहलवान विनेश फोगाट को घरेलू टूर्नामेंट में भाग लेने से रोकने के उनके फैसले पर सवाल उठाया। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि फोगाट का मूल्यांकन करने के लिए एक विशेषज्ञ पैनल बनाया जाए और सुनिश्चित किया जाए कि वह आगामी एशियन गेम्स के सिलेक्शन ट्रायल में हिस्सा ले सके।
चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने टिप्पणी की कि WFI का शीर्ष खिलाड़ियों को भाग लेने की अनुमति देने की पूर्व प्रथा पर न चलना ‘काफी कुछ कहता है’। अदालत ने यह भी जोर देकर कहा कि देश में मातृत्व को सम्मानित किया जाता है और संघ को किसी भी तरह की ‘प्रतिशोध’ की भावना से काम नहीं करना चाहिए।
हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से निर्देश दिया कि विशेषज्ञ पैनल से फोगाट की संभावनाओं का मूल्यांकन किया जाए और उसे सभी जरूरी अवसर प्रदान किए जाएं ताकि वह आगामी प्रतियोगिताओं में भाग लेने में बाधित न हो।