नई दिल्ली, 25 जून
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को नकली तथा पायरेटेड पाठ्यपुस्तकों से सतर्क रहने की सलाह दी है। परिषद ने चेतावनी दी है कि उसकी पुस्तकों के अनधिकृत और फर्जी संस्करण बाजार के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर भी तेजी से प्रसारित किए जा रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों तक गलत और भ्रामक जानकारी पहुंचने का खतरा बढ़ गया है।
एनसीईआरटी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक संदेश में बताया कि सोशल मीडिया और विभिन्न मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की एक पुस्तक पूरी तरह फर्जी है। परिषद ने स्पष्ट किया कि यह पुस्तक एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित नहीं की गई है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से उपलब्ध पाठ्यपुस्तकों का ही उपयोग करें और किसी भी संदिग्ध सामग्री पर भरोसा न करें।
परिषद ने कहा कि उसकी सभी पाठ्यपुस्तकें केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्रकाशित और जारी की जाती हैं। किसी भी नई पुस्तक को आधिकारिक रूप से जारी किए जाने से पहले उसे प्रिंट, साझा या प्रसारित करने की अनुमति नहीं होती। इसलिए छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को केवल एनसीईआरटी के अधिकृत स्रोतों से प्राप्त पुस्तकों को ही प्रमाणिक मानना चाहिए।
एनसीईआरटी के अनुसार सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स या अन्य अनौपचारिक माध्यमों से साझा की जाने वाली सामग्री कई बार गलत, अधूरी, संशोधित या पूरी तरह मनगढ़ंत हो सकती है। ऐसी सामग्री का उपयोग करने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और उन्हें गलत जानकारी मिल सकती है। परिषद ने कहा कि किसी भी वायरल पुस्तक या अध्ययन सामग्री का उपयोग करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करना आवश्यक है।
परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी कॉपीराइट सामग्री को बिना अनुमति प्रिंट करना, उसकी प्रतियां बनाना, वितरित करना या डिजिटल माध्यमों पर साझा करना कानून का उल्लंघन है। ऐसी गतिविधियां कॉपीराइट अधिनियम, 1957 तथा अन्य संबंधित कानूनों के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आती हैं। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
एनसीईआरटी ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन से अपील की है कि वे पाठ्यपुस्तकें केवल परिषद की आधिकारिक वेबसाइट, ई-पाठशाला पोर्टल और अधिकृत विक्रेताओं से ही प्राप्त करें। परिषद ने बताया कि उसकी सभी डिजिटल पुस्तकें आधिकारिक वेबसाइट और ई-पाठशाला प्लेटफॉर्म पर नि:शुल्क उपलब्ध हैं। ऐसे में किसी भी अनधिकृत वेबसाइट, मोबाइल ऐप या सोशल मीडिया चैनल से किताबें डाउनलोड करने या खरीदने से बचना चाहिए।
परिषद ने लोगों को विशेष रूप से उन सोशल मीडिया चैनलों, लिंक और ऐप्स से सावधान रहने की सलाह दी है, जो एनसीईआरटी की किताबें या उनके आधिकारिक प्रकाशन से पहले की सामग्री उपलब्ध कराने का दावा करते हैं। एनसीईआरटी ने स्पष्ट किया है कि नकली और पायरेटेड सामग्री का प्रसार करने वालों के खिलाफ लगातार कानूनी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही यदि किसी व्यक्ति को ऐसी किसी अनधिकृत गतिविधि की जानकारी मिलती है, तो वह इसकी सूचना ईमेल के माध्यम से सीधे एनसीईआरटी को दे सकता है।