नई दिल्ली, 26 जून
देशभर के व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति पर लागू सभी अस्थायी प्रतिबंध हटाने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था में सुधार होने के बाद अब देश में व्यावसायिक गैस की आपूर्ति को पूरी तरह सामान्य किया जा सकता है।
पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण एलपीजी की वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई थी। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने कमर्शियल एलपीजी गैस की आपूर्ति पर कुछ अस्थायी पाबंदियां लागू की थीं, ताकि घरेलू जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके। अब हालात सामान्य होने के बाद इन प्रतिबंधों को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार के इस फैसले से होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग सेवाएं, छोटे उद्योग और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को पहले की तरह नियमित रूप से एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध हो सकेंगे। इससे ईंधन की उपलब्धता को लेकर बनी अनिश्चितता कम होगी और कारोबारियों को अपनी जरूरत के अनुसार गैस प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि इससे विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार एलपीजी की उपलब्धता अब पहले की तुलना में अधिक स्थिर हो गई है। इसी वजह से कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए गैस वितरण को पूरी क्षमता के साथ फिर से शुरू किया जा रहा है। मंत्रालय का कहना है कि इससे आपूर्ति व्यवस्था अधिक सुचारु होगी और उद्योगों को संचालन में किसी प्रकार की बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को बढ़ावा देने की नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जिन संस्थानों ने पहले से पीएनजी का उपयोग शुरू कर दिया है, वे उसी व्यवस्था के तहत काम करते रहेंगे। वहीं जिन क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क उपलब्ध है, वहां अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को चरणबद्ध तरीके से इस स्वच्छ और सुविधाजनक ईंधन से जोड़ने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह बहाल होने के साथ ही सरकार ने प्रोपेन और ब्यूटेन के उपयोग से जुड़े कुछ पुराने प्रतिबंधों में भी राहत देने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि इस कदम से औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी तथा ईंधन की उपलब्धता पहले की तुलना में अधिक सुचारु और संतुलित हो सकेगी।