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16 घंटे तक धधकते रहे कसौली के जंगल… फिर सुखना झील के पानी से सेना ने ऐसे पाया आग पर काबू

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Published On: May 27, 2026

शिमला, 27 मई

हिमाचल प्रदेश के कसौली के घने जंगलों में लगी भीषण आग को आखिरकार भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना ने संयुक्त अभियान चलाकर पूरी तरह बुझा दिया। करीब 16 घंटे तक लगातार धधकती रही इस आग ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था। आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि आसपास के संवेदनशील वन क्षेत्रों और रिहायशी इलाकों तक खतरा पहुंचने लगा था, लेकिन समय रहते शुरू किए गए बड़े सैन्य अभियान ने हालात को नियंत्रण में कर लिया।

जानकारी के अनुसार 26 मई 2026 की दोपहर करीब तीन बजे कसौली की पश्चिमी ढलानों पर स्थित गिल्बर्ट ट्रेल और अपर मॉल क्षेत्र के जंगलों में अचानक आग भड़क उठी। सूखी घास, चीड़ की पत्तियों और घने जंगल के कारण आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया। तेज हवाओं ने आग को और भड़का दिया, जिससे ऊंची-ऊंची लपटें दूर तक दिखाई देने लगीं। हालात लगातार गंभीर होते जा रहे थे और आशंका जताई जा रही थी कि यदि आग पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो यह आसपास की बस्तियों और पर्यटक स्थलों तक पहुंच सकती है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना की कसौली ब्रिगेड ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। सेना के जवान कठिन पहाड़ी इलाकों में उतरकर आग बुझाने में जुट गए। जवानों ने आग को फैलने से रोकने के लिए फायरब्रेक तैयार किए, जिसमें जंगल के कुछ हिस्सों को काटकर अलग किया गया ताकि आग आगे न बढ़ सके। जमीन पर फायर टेंडर और पानी के टैंकर लगातार पानी की बौछारें करते रहे, जबकि रातभर जवान बिना रुके अभियान में डटे रहे।

इस अभियान में भारतीय वायुसेना की भूमिका भी बेहद अहम रही। वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने चंडीगढ़ स्थित सुखना झील से पानी भरकर ‘बम्बी बकेट’ तकनीक के जरिए जंगलों में आग पर पानी गिराया। हेलीकॉप्टरों ने दिन और रात दोनों समय लगातार कई उड़ानें भरीं, जिससे आग की तीव्रता को काफी हद तक कम किया जा सका। सेना और वायुसेना के बीच बेहतरीन तालमेल ने इस कठिन अभियान को सफल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।

27 मई की सुबह तक आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। हालांकि सेना के जवान अब भी इलाके में तैनात हैं और जंगल के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद छोटे हॉटस्पॉट्स को पूरी तरह ठंडा करने का काम कर रहे हैं ताकि आग दोबारा न भड़क सके। राहत की बात यह रही कि इस पूरी घटना में किसी भी व्यक्ति के घायल होने या जान जाने की खबर नहीं है। अभियान में शामिल सभी जवान और उपकरण भी सुरक्षित बताए गए हैं।

पश्चिमी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेन्द्र सिंह ने स्वयं घटनास्थल का दौरा कर पूरे अभियान की समीक्षा की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में दिन-रात काम करने वाले जवानों की बहादुरी, साहस और समर्पण की सराहना की। इस दौरान कई जवानों को मौके पर ही प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।

यह अभियान एक बार फिर साबित करता है कि प्राकृतिक आपदाओं के समय भारतीय सेना और वायुसेना किस तरह तेजी और समन्वय के साथ काम करती हैं। स्थानीय प्रशासन और लोगों ने भी सेना के इस प्रयास की जमकर तारीफ की है। समय रहते आग पर काबू पा लेने से न केवल जंगलों को बड़े नुकसान से बचाया गया, बल्कि आसपास की बस्तियों और पर्यटन स्थलों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकी।

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