चंडीगढ़, 22 जून
पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा की जाने वाली मनमानी फीस वृद्धि पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट’ में संशोधन के लिए तैयार किए गए अध्यादेश को मंजूरी दे दी गई। नए प्रावधानों के तहत अब राज्य का कोई भी गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूल सालाना फीस और विभिन्न फंडों में पांच प्रतिशत से अधिक की वृद्धि नहीं कर सकेगा।
कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि अध्यादेश को अंतिम मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जा रहा है। हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि अध्यादेश लागू होने के बाद नियमों की अवहेलना करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान जिन स्कूलों ने अनुचित तरीके से फीस बढ़ाकर अभिभावकों से अतिरिक्त राशि वसूली है, उन्हें वह रकम वापस करनी होगी।
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यदि किसी निजी स्कूल को विशेष परिस्थितियों में पांच प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने की आवश्यकता महसूस होती है तो उसे सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति के समक्ष ठोस कारण और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। समिति किसी भी निर्णय से पहले स्कूल की वित्तीय स्थिति का विस्तृत ऑडिट भी करवाएगी। उन्होंने बताया कि जिन स्कूलों पर मनमाने ढंग से फीस वसूलने का संदेह है, उनके रिकॉर्ड सीज करने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी गई है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तीन जून को ही फीस कैपिंग की घोषणा की थी। यह निर्णय अमृतसर में 17 वर्षीय एक छात्रा की कथित आत्महत्या की दुखद घटना के बाद लिया गया, जिसके पीछे स्कूल फीस का दबाव और मानसिक प्रताड़ना को कारण बताया गया था। इस घटना ने पूरे राज्य में निजी स्कूलों की फीस नीति को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी थी।
मंत्रिमंडल ने शिक्षा क्षेत्र के अलावा उद्योग जगत को भी राहत देने का फैसला किया है। बैठक में वर्ष 1978 से 2003 के बीच लागू विभिन्न औद्योगिक नीतियों के तहत बंद हो चुके उद्योगों के लिए विशेष ‘वन टाइम सेटलमेंट स्कीम’ को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत पात्र उद्योगों को लंबित वित्तीय लाभ और रियायतें प्रदान की जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।