चंडीगढ़, 6 जुलाई
पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल के चंडीगढ़ दौरे से पहले पार्टी में सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से मुलाकात कर एकजुटता का संदेश दिया है। दोनों नेताओं की बैठक की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए रंधावा ने लिखा, “एकता में ताकत है।”
रंधावा द्वारा साझा की गई तस्वीर में विधायक बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा, विधायक तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु और पूर्व विधायक कुशलदीप सिंह ढिल्लों भी नजर आए। यही तस्वीर और कैप्शन पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, चरणजीत सिंह चन्नी तथा पंजाब कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से भी साझा किया गया, जिसे पार्टी में एकजुटता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर पंजाब कांग्रेस अभियान समिति के अध्यक्ष चरणजीत सिंह चन्नी और कोर कमेटी के अध्यक्ष सुखजिंदर सिंह रंधावा ने वरिष्ठ नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में चुनावी रणनीति, संगठन को मजबूत करने और आगामी कार्यक्रमों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
उधर, पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल रविवार को चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे। उनके नाराज नेताओं से भी बातचीत करने की संभावना है, ताकि संगठन में चल रही नाराजगी और गुटबाजी को दूर किया जा सके। पार्टी नेतृत्व का प्रयास है कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को पूरी तरह एकजुट किया जाए।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की ओर से भेजे गए दो वरिष्ठ नेताओं ने भी पंजाब के कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं से मुलाकात कर उनकी राय जानी है। दोनों नेता अपनी रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को सौंपेंगे। राजनीतिक हलकों में यह दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पहले पंजाब कांग्रेस में किसी बड़े बदलाव को टालने में भूपेश बघेल की सिफारिश महत्वपूर्ण मानी गई थी।
इस बीच, पूर्व मंत्री रजिया सुल्ताना के पति और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद मुस्तफा ने पार्टी हाईकमान को खुला पत्र लिखकर प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से पद छोड़ने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंजाब कांग्रेस में जारी असंतोष को समाप्त करने के लिए हाईकमान को निर्णायक कदम उठाने चाहिए। उनका कहना है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में व्याप्त मतभेद खत्म होना जरूरी है और प्रदेश अध्यक्ष का चयन योग्यता के आधार पर किया जाना चाहिए। मोहम्मद मुस्तफा को पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू का करीबी माना जाता है।
वहीं, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल ने भी कांग्रेस नेताओं से व्यक्तिगत मतभेद और गुटबाजी भुलाकर संगठन को मजबूत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी नेताओं को व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर पार्टी के हित में काम करना चाहिए, ताकि भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी को कांग्रेस के खिलाफ दुष्प्रचार का अवसर न मिले।
पार्टी हाईकमान ने भी नाराज नेताओं को भरोसा दिलाया है कि उनकी बात पूरी गंभीरता से सुनी जाएगी और सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। कांग्रेस नेतृत्व का लक्ष्य वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में चल रही गुटबाजी को समाप्त कर पार्टी को एकजुट करना है। वहीं, मोहम्मद मुस्तफा ने भी कहा कि मौजूदा हालात पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं और इन्हें जल्द दूर किया जाना चाहिए।