मुंबई, 5 जून
घर, वाहन और अन्य कर्ज लेने वालों को फिलहाल अपनी मासिक किस्त (EMI) में किसी राहत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और महंगाई के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को घटाया है और मुद्रास्फीति के अनुमान में बढ़ोतरी की है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को बताया कि छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। समिति ने न केवल नीतिगत दर को स्थिर रखा, बल्कि मौद्रिक नीति का रुख भी ‘तटस्थ’ बनाए रखा है। इसका अर्थ है कि भविष्य में आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार ब्याज दरों में बदलाव की संभावना खुली रहेगी।
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी अल्पकालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं। चूंकि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है, इसलिए आवास, ऑटो और वाणिज्यिक ऋणों की EMI में भी तत्काल कोई परिवर्तन होने की संभावना नहीं है।
रिजर्व बैंक ने वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। वहीं खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया गया है।
दरअसल, पश्चिम एशिया में फरवरी के अंत से जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इससे महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका गहरा गई है, जिसे ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक ने सतर्क रुख अपनाया है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष फरवरी से दिसंबर 2025 के बीच आरबीआई रेपो रेट में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। इसके बाद फरवरी और अप्रैल 2026 की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षाओं में भी रेपो रेट को स्थिर रखा गया था। अब जून की समीक्षा में भी यथास्थिति बनाए रखने से यह संकेत मिला है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर करीबी नजर बनाए हुए है।