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अकाली दल पुनर्सुरजीत में भूकंप: मनप्रीत अयाली ने सभी पदों से दिया इस्तीफा

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Published On: May 20, 2026

लुधियाना, 20 मई

पंजाब की पंथक राजनीति में बुधवार को एक बड़ा और अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। शिरोमणि अकाली दल पुनर्सुरजीत के वरिष्ठ नेता मनप्रीत सिंह अयाली ने अचानक अपने सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। इस कदम ने न केवल पार्टी में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि पंथक राजनीति में भी भविष्य की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया पर जारी किए गए वीडियो और विस्तृत संदेश में अयाली ने पार्टी के पुनर्गठन की प्रक्रिया, पुरानी लीडरशिप की भूमिका और पंथक एकजुटता के मुद्दों पर अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका राजनीतिक भविष्य दिल्ली से संचालित किसी भी राजनीतिक दल में शामिल होने से जुड़ा नहीं होगा। भाजपा, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और बादल गुट का नाम लेते हुए अयाली ने कहा कि उनका अगला कदम पूरी तरह पंथ और सिख बुद्धिजीवियों की भावनाओं के अनुरूप होगा।

अयाली ने अपने इस्तीफे के पीछे पार्टी के पुनर्गठन और सदस्यता अभियान की जिम्मेदारियों को लेकर छह प्रमुख कारण गिनाए। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह काम पूरी निष्ठा से किया, बिना किसी पद या निजी लाभ की इच्छा के, लेकिन परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीं रहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि वह नेतृत्व, जिसे अकाल तख्त साहिब की ओर से नैतिक अधिकार प्राप्त था, पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हुआ। इससे पुनर्गठन की प्रक्रिया बाधित हुई और संगत, कार्यकर्ताओं और कुछ नेताओं ने भी दूरी बनानी शुरू कर दी।

अयाली ने यह भी कहा कि उन्होंने लगातार सुझाव दिया कि पुरानी लीडरशिप कुछ समय के लिए पीछे हटे ताकि नए ढांचे को स्वीकार्यता मिल सके, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। बैठकों में लिए गए फैसलों और बाद में सामने आने वाली खबरों के बीच अंतर ने भी असंतोष को बढ़ाया। इसके अलावा, उन्होंने पंथक ताकतों को एक मंच पर लाने के प्रयासों का जिक्र किया, जिसमें वारिस पंजाब दे सहित अन्य संगठनों के साथ तालमेल बनाने की कोशिश भी शामिल थी, लेकिन पुरानी लीडरशिप की भूमिका को लेकर सहमति नहीं बन सकी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अयाली का इस्तीफा केवल संगठनात्मक फैसला नहीं है, बल्कि पंजाब की पंथक राजनीति के भविष्य के लिए भी बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब अकाली राजनीति पहले से नेतृत्व संकट और जनाधार की चुनौती का सामना कर रही है।

अयाली ने अंत में यह स्पष्ट किया कि उनका किसी व्यक्ति से निजी मतभेद नहीं है। उनका उद्देश्य केवल पंथ की भावनाओं और पंजाब के हित में निर्णय लेना है, और आने वाले समय में जो भी कदम उठाया जाएगा, वह इन्हीं प्राथमिकताओं के अनुरूप होगा।

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