चंडीगढ़ , 16 Jun
सीएम भगवंत मान ने अपने कथित विवादित वायरल वीडियो को पूरी तरह नकार दिया है। चंडीगढ़ में पत्रकारवार्ता में सीएम ने कहा कि वीडियो में जो शख्स दिखाई दे रहा है वह मैं नहीं हूं। मैं हैरान हूं कि पंथ के इतने बड़े ओहदे पर बैठे लोग सियासी मोहरे की तरह काम कर रहे हैं। वीडियो में जो शख्स है, न तो उसकी कद काठी मुझसे मिलती है। यह मुझे केवल बदनाम करने की साजिश है। अपने सियासी आकाओं के इशारों पर मेरे खिलाफ यह हुक्मनामा दिया गया है। यह मेरे खिलाफ एक प्रोपेगेंडा है।
सीएम ने कहा कि मैं पंजाब में गुरु की बाणी, पानी, किसानी और जवानी के लिए जो सरकारी फैसला ले रहा हूं वह मेरे विरोधियों को बर्दाश्त नहीं हो रहे हैं। इसलिए मुझे बदनाम करने के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं और इसके लिए धर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने ने कहा कि मैं श्री अकाल तख्त को सर्वोच्च संस्था मानता हूं और उसके आगे नतमस्तक होता हूं। श्री अकाल तख्त से मत्था लगाने के बारे में न तो मैं सोच सकता हूं और न ही मेरी आने वाली कई पीढ़ियां ऐसा सोच सकती हैं लेकिन श्री अकाल तख्त पर जो सियासी नियुक्तियां हुई हैं और ये लोग जिस तरह के फैसले ले रहे हैं, वह सारी संगत अच्छी तरह जानती है।
इससे पहले श्री अकाल तख्त साहिब से पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के खिलाफ कई अहम फैसलों की घोषणा की गई। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि बेअदबी कानून में संशोधन संबंधी निर्देशों की अनदेखी और अन्य मामलों को लेकर मुख्यमंत्री के खिलाफ हुक्मनामा जारी किया गया है। साथ ही 29 जून को पंजाब मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों और संबंधित सिख विधायकों को श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होने के लिए तलब किया गया है। इस संबंध में सभी हिंदू विधायकों से लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा है।
श्री अकाल तख्त साहिब पर हुई बैठक के बाद जत्थेदार ने कहा कि सिख पंथ की ओर से पंजाब सरकार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी कानून में मौजूद आपत्तिजनक प्रावधानों को हटाने के लिए कहा गया था। इस संबंध में सरकार को पत्र लिखकर 15 दिन के भीतर संशोधन करने का निर्देश दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसे श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों की अवहेलना बताया गया।
जत्थेदार ने कहा कि सिख पंथ किसी भी स्थिति में बिना संशोधित कानून को लागू नहीं होने देगा। उनका कहना था कि बिल में ऐसे प्रावधान हैं जिन पर सिख समुदाय ने आपत्ति जताई है और इन्हें हटाए बिना कानून स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा और सर्वोच्चता से समझौता नहीं किया जा सकता। इसी कारण इस बिल को समर्थन देने वाले सभी सिख विधायकों और पंजाब सरकार की पूरी कैबिनेट को 29 जून को तलब किया गया है ताकि वे अपना पक्ष रख सकें।