जालंधर, 31 जुलाई
पंजाब के अमृतसर जिले के बल सचंदर गांव के युवा वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश और प्रदेश का नाम रोशन कर दिया। पुरुषों के +110 किलोग्राम भारवर्ग में उन्होंने कुल 388 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि के पीछे वर्षों की कठिन मेहनत, संघर्ष और परिवार के त्याग की प्रेरणादायक कहानी छिपी हुई है।
लवप्रीत सिंह ने प्रतियोगिता के स्नैच वर्ग में 176 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 212 किलोग्राम वजन उठाया। दोनों प्रयासों को मिलाकर उनका कुल स्कोर 388 किलोग्राम रहा, जिसके दम पर उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया। इससे पहले वर्ष 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भी वह कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके थे।
साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले लवप्रीत की सफलता आसान नहीं रही। उनके पिता किरपाल सिंह दर्जी का काम करते हैं, जबकि दादा गुरमेज सिंह और चाचा वर्षों तक सब्जियां बेचकर परिवार का गुजारा करते रहे। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने कभी उनके सपनों को टूटने नहीं दिया। प्रशिक्षण पर जाने से पहले लवप्रीत रोज सुबह पांच बजे अपने दादा और चाचा के साथ सब्जी मंडी पहुंचकर ट्रकों से सब्जियां उतारने में मदद करते थे। इसके बाद ही वह अभ्यास के लिए निकलते थे।
लवप्रीत ने आठवीं कक्षा के दौरान वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की थी। गांव के खिलाड़ियों से प्रेरित होकर उन्होंने इस खेल में अपना भविष्य बनाने का सपना देखा। उनके पिता बताते हैं कि जब गांव के एक खिलाड़ी ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था, तब पूरे गांव में जश्न का माहौल था। उसी पल उन्होंने तय कर लिया कि वह अपने बेटे को भी खेलों में आगे बढ़ाएंगे।
मेहनत का पहला बड़ा परिणाम उन्हें नौवीं कक्षा में मिला, जब उन्होंने अपना पहला राज्य स्तरीय पदक जीता। इसके बाद सफलता का सिलसिला लगातार आगे बढ़ता गया। प्रशिक्षण केंद्र घर से काफी दूर होने के कारण उनके पिता रोज उन्हें साइकिल पर बस स्टॉप तक छोड़ने जाते थे। वहां से लवप्रीत ऑटो-रिक्शा के जरिए कॉलेज के मैदान में अभ्यास करने पहुंचते थे। किरपाल सिंह बताते हैं कि यही उनकी रोजमर्रा की दिनचर्या थी और संघर्ष की शुरुआत भी वहीं से हुई थी।
अपने बेटे की उपलब्धि पर भावुक हुए किरपाल सिंह ने कहा कि पहले कांस्य और अब रजत पदक जीतने के बाद उनकी खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यह सब ईश्वर की कृपा और बेटे की अथक मेहनत का परिणाम है। परिवार ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन उनका बेटा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेगा।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लवप्रीत सिंह का यह रजत पदक केवल एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और परिवार के सहयोग से हर चुनौती को पार किया जा सकता है।