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भारत पर फिर अमेरिकी टैरिफ की तलवार… क्या व्यापार वार्ता के बीच बढ़ेगा नया तनाव?

वॉशिंगटन, 3 जून

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन इसी बीच अमेरिकी प्रशासन की एक नई पहल ने दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका अब भारत समेत 60 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। इस प्रस्ताव के पीछे अमेरिका ने आरोप लगाया है कि ये देश जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं के निर्यात पर प्रभावी रोक लगाने में नाकाम रहे हैं।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने कहा है कि अमेरिकी व्यापार कानून 1974 की धारा 301 के तहत की गई समीक्षा में पाया गया कि 60 देशों की नीतियां और कार्यप्रणालियां अमेरिकी व्यापार के लिए अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न करती हैं। यूएसटीआर के अनुसार, इन देशों द्वारा जबरन श्रम से बने उत्पादों के निर्यात पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं लगाया गया है, जिससे अमेरिकी बाजार और कामगार प्रभावित हो रहे हैं।

भारत के अलावा इस सूची में ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, बांग्लादेश, चीन, जापान, सऊदी अरब, सिंगापुर, ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे कई प्रमुख व्यापारिक साझेदार देश भी शामिल हैं। यूएसटीआर का दावा है कि इन देशों की नीतियां वैश्विक स्तर पर जबरन श्रम को समाप्त करने के प्रयासों को कमजोर करती हैं।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि प्रमुख व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन श्रम से तैयार वस्तुओं के निर्यात को रोकने में विफलता स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति अमेरिकी कामगारों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा का माहौल पैदा करती है और घरेलू उद्योगों पर दबाव बढ़ाती है।

यूएसटीआर ने इन देशों पर 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है और इस संबंध में सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत सहित कई देशों के निर्यातकों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के प्रयास तेज हैं। हाल के महीनों में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है, जिनमें बाजार पहुंच, शुल्क व्यवस्था, डिजिटल व्यापार और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ प्रस्ताव ने आगामी वार्ताओं के माहौल को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

इबोला के खतरे के बीच एयर फ्रांस की उड़ान डेट्रॉइट की बजाय मॉन्ट्रियल में उतरी

टोरंटो, मई 22
कांगो के एक यात्री को इबोला प्रकोप से जुड़ी यात्रा प्रतिबंधों के बावजूद पेरिस से डेट्रॉइट जाने वाली एयर फ्रांस की उड़ान में सवार होने दिया गया। अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि उस यात्री को अमेरिका में प्रवेश नहीं मिलना चाहिए था, क्योंकि अमेरिका ने इबोला के फैलाव को रोकने के लिए कांगो और कुछ अन्य अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस यात्री को ले जा रही उड़ान को डेट्रॉइट मेट्रोपॉलिटन वेन काउंटी एयरपोर्ट पर उतरने से रोक दिया और विमान को कनाडा के मॉन्ट्रियल की ओर मोड़ दिया। एयर फ्रांस ने भी पुष्टि की कि कांगो का यह यात्री अमेरिका में प्रवेश नहीं कर सका क्योंकि नए नियमों के तहत ऐसे देशों से आने वाले यात्रियों को केवल वॉशिंगटन के माध्यम से ही अमेरिका में प्रवेश करने की अनुमति है।

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने कहा कि अमेरिका आने वाले सभी नागरिक और स्थायी निवासी जो पिछले 21 दिनों में कांगो, युगांडा या दक्षिण सूडान में रहे हैं, उन्हें अतिरिक्त जांच के लिए केवल वॉशिंगटन डलास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से ही अमेरिका में प्रवेश करने की अनुमति होगी।

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