चंडीगढ़ एयरपोर्ट तक पहुंच होगी आसान, मोहाली से नया वैकल्पिक मार्ग 31 मई से चालू
चंडीगढ़, 29 मई
चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक मोहाली की ओर से पहुंचने वाले यात्रियों के लिए एक नई राह खुलने वाली है। 31 मई 2026 से बावा व्हाइट हाउस, मोहाली से एयरपोर्ट तक एक छोटा और वैकल्पिक मार्ग चालू होने जा रहा है। यह जानकारी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट को दी गई। करीब एक दशक पुरानी एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से जुड़ी कानूनी लड़ाई में यह कदम अहम माना जा रहा है।
2015 में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस खोसला के बयान को रिकॉर्ड किया। अदालत को बताया गया कि यह नया मार्ग पूरी तरह तैयार है और इसे 31 मई तक चालू कर दिया जाएगा, जिस पर अदालत ने कहा, “ऐसा किया जाए।” हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सेक्टर 47-48, चंडीगढ़ के चौराहे से एयरपोर्ट तक प्रस्तावित “सबसे छोटे मार्ग” के मुद्दे पर अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी।
फिलहाल पंजाब और हरियाणा से एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए PR-7 रोड मुख्य मार्ग बनी हुई है। नए मार्ग के शुरू होने से यात्रा दूरी कम होने के साथ ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है। यह मामला मोहाली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन द्वारा 2015 में दायर जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें एयरपोर्ट तक बेहतर सड़क संपर्क और आधुनिक सुविधाओं की मांग की गई थी।
पंजाब सरकार ने पहले हाई कोर्ट को बताया था कि एयरपोर्ट तक 8.5 किलोमीटर लंबी वैकल्पिक सड़क का निर्माण किया जा रहा है। यह 50 मीटर चौड़ी सड़क स्वीकृत योजना के अनुसार बनाई गई है और सेक्टर 65-66 जंक्शन के पास बावा व्हाइट हाउस से होकर सेक्टर 66-बी तक जाएगी। इससे चंडीगढ़ और मोहाली से एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों का सफर काफी आसान होगा।
साथ ही जगतपुरा गांव से जुड़ी 18 फीट चौड़ी लिंक रोड को भी मजबूत किया जा रहा है और उसका अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एयरपोर्ट तक खराब कनेक्टिविटी और अपर्याप्त ढांचा पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के व्यापार और निवेश को प्रभावित कर रहा है। बेहतर सड़क संपर्क और आधुनिक सुविधाएं चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट को पूर्ण अंतरराष्ट्रीय एविएशन हब बनाने के लिए जरूरी हैं।
इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता एमएल सरीन अदालत की सहायता अमिकस क्यूरी के रूप में कर रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन और वरिष्ठ सरकारी वकील अरुण गोसाईं पेश हुए।







