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पंजाब कैबिनेट का बड़ा फैसला : ठेकेदारी प्रथा खत्म

चंडीगढ़ , 30 May

पंजाब में निजी ठेका प्रथा को खत्म कर दिया गया है। कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लगाई गई। सीएम भगवंत मान ने कहा कि अब आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत कर्मचारी सरकार के अधीन काम करेंगे। CM मान ने कहा कि इसके लिए सरकार अध्यादेश लाएगी, जिसे राज्यपाल के पास भेजकर मंजूरी ली जाएगी ताकि जल्द इसका लाभ मिले। अध्यादेश के बाद मानसून सत्र में पंजाब स्टेट आउटसोर्स पर्सनल बिल-2026 व पंजाब कांट्रेक्टचुअल पर्सनल बिल-2026 लाए जाएंगे।

उन्होंने ने कहा कि आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत कर्मियों की भर्ती का मकसद उन्हें निजी ठेकेदारी की मनमानियों और वित्तीय शोषण से मुक्ति दिलाना है। इसके अधीन कर्मचारी दो श्रेणी में विभक्त होंगे। पहला खतरनाक श्रेणी और दूसरा गैर खतरनाक श्रेणी।

खतरनाक श्रेणी में फायर ब्रिगेड के चालक व फायरमैन, बिजली निगम के लाइनमैन व कंपलेंट हैंडलिंग बाइकर्स और निगम के सीवरमैन व अन्य सफाई कर्मी होंगे। अन्य कर्मचारी गैर खतरनाक श्रेणी में शामिल होंगे।
खतरनाक श्रेणी के जिन कर्मचारियों का तीन साल व गैर खतरनाक कर्मियों का पांच साल का ठेका पीरियड पूरा हो जाएगा, वे सरकार की आउटसोर्सिंग पॉलिसी के अंतर्गत सीधे सरकार के अधीन काम करेंगे।

सरकारी कर्मचारियों की तरह आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। पंजाब में 65048 कर्मचारी ऐसे हैं जो अभी निजी ठेका प्रथा के अधीन हैं। ये कर्मचारी 51 विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।जो तीन व पांच साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं, उनकी संख्या 26400 है। अध्यादेश मंजूर होते ही इन्हें तुरंत लाभ मिलेगा। इसके बाद इनकी बायोमीट्रिक हाजिरी लगेगी, छुट्टियां का भी पूरा लाभ मिलेगा। वेतन के साथ-साथ ईपीएफ का लाभ, कर्मचारी राज्य बीमा, ग्रेच्युअटी का लाभ भी मिलेगा।

आप के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने एक्स पर लिखा-पंजाब सरकार का ऐतिहासिक फैसला। प्रदेश में ठेकेदारी प्रथा खत्म कर दी है। इससे जुड़े प्रस्ताव पर पंजाब कैबिनेट ने मुहर लगाई। कैबिनेट के इस फैसले से ठेके पर काम कर रहे 65000 कर्मचारी पक्के होंगे और सीधे सरकार के विभाग में काम करेंगे।

बंगाल में बड़ा बदलाव ! महिलाओं को हर महीने ₹3000, मुफ्त बस यात्रा समेत शुभेंदु सरकार के बड़े ऐलान

 

कोलकाता, मई 18

पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने के बाद शुभेंदु सरकार लगातार बड़े फैसले लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने कई अहम निर्णयों पर मुहर लगाई, जिनका सीधा असर राज्य की महिलाओं, कर्मचारियों और आम जनता पर पड़ने वाला है। बैठक के बाद मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने इन फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने जनता से किए गए वादों को तेजी से लागू करना शुरू कर दिया है।

सबसे बड़ा फैसला महिलाओं के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ को मंजूरी देने का रहा। इस योजना के तहत राज्य की महिलाओं को आगामी 1 जून से हर महीने 3000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे लाखों महिलाओं को आर्थिक मजबूती मिलेगी और परिवारों की आय में सहारा मिलेगा। इसके साथ ही महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा को भी मंजूरी दे दी गई है। यह सुविधा भी 1 जून से लागू होगी, जिससे रोजाना सफर करने वाली महिलाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

कैबिनेट बैठक में राज्य कर्मचारियों के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया। सरकार ने सातवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। यह आयोग राज्य कर्मचारियों, संबद्ध वैधानिक संस्थाओं और शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों को लेकर सिफारिशें करेगा। लंबे समय से कर्मचारी संगठन इसकी मांग कर रहे थे।

इसके अलावा सरकार ने धार्मिक आधार पर विभिन्न समूहों को दी जाने वाली सरकारी सहायता जून महीने से बंद करने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि अब योजनाओं का लाभ सभी पात्र लोगों तक समान रूप से पहुंचाया जाएगा। वहीं नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA के तहत आवेदन करने वाले लोगों और मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए ट्रिब्यूनल में आवेदन करने वालों को भी अन्नपूर्णा योजना का लाभ देने का फैसला किया गया है।

इससे पहले अपनी पहली कैबिनेट बैठक में भी शुभेंदु सरकार ने कई बड़े फैसले लिए थे। स्कूलों में नौकरी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की अधिकतम आयु सीमा पांच साल बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसका वादा किया था, जिसे सरकार ने सत्ता में आते ही लागू कर दिया।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए आयुष्मान भारत योजना को बंगाल में लागू करने का फैसला लिया है। पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इस योजना को राज्य में लागू नहीं किया था। अब आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को केंद्र सरकार की स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिल सकेगा।

सीमा सुरक्षा को लेकर भी सरकार सख्त नजर आई। बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन देने के फैसले को मंजूरी दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घुसपैठ रोकने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है और जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया अगले 45 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी।

इसके साथ ही बंगाल में भारतीय न्याय संहिता (BNS) को औपचारिक रूप से लागू करने का फैसला भी लिया गया है। पिछली सरकार ने इसे लागू नहीं किया था। वहीं गृह मंत्रालय के जून 2025 के जनगणना संबंधी परिपत्रों को भी तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश दिया गया है।

शुभेंदु सरकार के इन फैसलों को बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। विपक्ष जहां इन घोषणाओं पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार इसे जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।

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