मुंबई , May 21
बॉबी देओल करियर की दूसरी पारी में लीक से हटकर किरदार कर रहे हैं। अनुराग कश्यप निर्देशित फिल्म ‘बंदर’ में बॉबी देओल एक बार फिर से इंटेंस रोल में दिख रहे हैं। फिल्म के ट्रेलर में उनके किरदार में कई शेड्स नजर आ रहे हैं।
फिल्म ‘बंदर’ के ट्रेलर की शुरुआत बॉबी देओल के किरदार के साथ होती है, जो कम उम्र की लड़कियों को डेट करता है। लेकिन एक लड़की से मुलाकात उसकी जिंदगी बदल देती है। उसे सलाखों के पीछे धकेल देती है। बॉबी देओल का किरदार खुद को बेगुनाह कहता है, लेकिन कोई उसकी नहीं सुनता है।
‘बंदर’ के ट्रेलर को देखकर लगता है कि यह कहानी दुष्कर्म के झूठे आरोप पर आधारित है। बॉबी का किरदार इस वजह से जेल भी जाता है। जेल के बुरे अनुभवों से वो गुजरता है। अपने किरदार में बॉबी काफी रम हुए नजर आते हैं। अलग-अलग सिचुएशन में उनकी एक्टिंग असर छोड़ती है।
अनुराग कश्यप निर्देशन ‘बंदर’ की कहानी सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी ने लिखी है। निखिल द्विवेदी इसके प्रोड्यूसर हैं। इस फिल्म में बॉबी देओल के अलावा सान्या मल्होत्रा, सपना पब्बी, सबा आजाद, इंद्रजीत सुकुमारन, जितेंद्र जोशी, राज बी. शेट्टी और नागेश भोंसले जैसे एक्टर्स भी नजर आएंगे। ‘बंदर’ 5 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
मुंबई, 18 मई:
बॉलीवुड के चर्चित फिल्ममेकर और अभिनेता अनुराग कश्यप एक बार फिर बड़े विवाद में घिर गए हैं। ब्राह्मण समुदाय को लेकर सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी अब उनके लिए कानूनी संकट बनती नजर आ रही है। गुजरात की सूरत अदालत ने उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं, वहीं गैर-जमानती वारंट जारी होने की खबरों ने भी हलचल बढ़ा दी है। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
मामला उस सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है, जिसे लेकर आरोप लगाया गया कि अनुराग कश्यप ने ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ अपमानजनक और भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया। सूरत की अदालत में यह शिकायत विश्व हिंदू परिषद से जुड़े नेता और वकील कमलेश रावल द्वारा दायर की गई थी। अदालत ने शिकायत पर सुनवाई करते हुए माना कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित पोस्ट विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने वाली हो सकती है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) एएस जानी की अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 352 और 353(2) के तहत अनुराग कश्यप के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अदालत का मानना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित टिप्पणियां एक विशेष समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली थीं।
विवाद की जड़ फिल्म ‘फूले’ को लेकर शुरू हुई बहस बताई जा रही है। समाज सुधारक ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले के जीवन पर आधारित इस फिल्म के ट्रेलर को लेकर कुछ ब्राह्मण संगठनों ने आपत्ति जताई थी। इसी दौरान सोशल मीडिया पर बहस तेज हुई और अनुराग कश्यप ने सेंसर बोर्ड तथा राजनीतिक व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी की। आरोप है कि इसी बहस में उन्होंने एक यूजर को जवाब देते हुए ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।
शिकायतकर्ता कमलेश रावल ने अपनी याचिका में अनुराग कश्यप के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट का भी उल्लेख किया है। दावा किया गया कि 2020 में भी उन्होंने हिंदू समाज और केंद्र सरकार को लेकर विवादित टिप्पणियां की थीं। शिकायत में यह भी कहा गया कि अदालत की ओर से भेजे गए समन का जवाब नहीं दिए जाने के कारण उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया।
फिलहाल अनुराग कश्यप की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि फिल्म जगत और सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आगे कानूनी कार्रवाई किस दिशा में बढ़ती है और क्या सचमुच अनुराग कश्यप को गिरफ्तारी का सामना करना पड़ेगा।