चंडीगढ़, 24 जुलाई
पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन (25/11) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर पंजाब सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन की घोषणा कर दी है। यूनियन ने ऐलान किया है कि 3 से 5 अगस्त तक पूरे प्रदेश में तीन दिवसीय पूर्ण हड़ताल और चक्का जाम किया जाएगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री आवास और परिवहन मंत्री के आवास के बाहर धरना दिया जाएगा, जबकि पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मुख्यमंत्री आवास के बाहर भूख हड़ताल भी की जाएगी।
चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूनियन के सूबा प्रधान रेशम सिंह गिल ने आरोप लगाया कि सरकार के साथ अब तक करीब 70 बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन कर्मचारियों की मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने का वादा किया था, लेकिन अब तक उस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
यूनियन नेताओं का आरोप है कि ठेकेदारी व्यवस्था के कारण कर्मचारियों का आर्थिक शोषण हो रहा है। उनका कहना है कि ईपीएफ और ईएसआई के नाम पर करोड़ों रुपये की अनियमितताएं हुई हैं और इसके संबंध में सरकार को प्रमाण भी सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
यूनियन के सूबा महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों और वरिष्ठ उपप्रधान हरकेश कुमार विक्की ने आरोप लगाया कि सरकार ‘किलोमीटर स्कीम’ के जरिए परिवहन विभाग का निजीकरण कर रही है। उनका दावा है कि जानबूझकर पंजाब रोडवेज और पनबस की सैकड़ों बसों को स्पेयर पार्ट्स, टायर और बैटरियों की कमी का हवाला देकर खड़ा रखा गया है, ताकि निजी बस ऑपरेटरों को फायदा मिल सके।
यूनियन के अनुसार, इस स्थिति के कारण विभाग को प्रतिदिन करीब डेढ़ लाख किलोमीटर परिचालन का नुकसान उठाना पड़ रहा है। नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में लगभग 800 सरकारी बसें कंडम हो चुकी हैं, लेकिन नई बसों की खरीद नहीं की गई। इसके अलावा कई लाभदायक रूट निजी कंपनियों को सौंपे जा रहे हैं और बसों के टाइम-टेबल में भी अनियमितताएं की जा रही हैं।
यूनियन ने अपने आंदोलन का विस्तृत कार्यक्रम भी जारी किया है। इसके तहत 27 जुलाई को पंजाब के सभी डिपो पर गेट रैलियां आयोजित की जाएंगी। इसके बाद 3, 4 और 5 अगस्त को पूरे राज्य में पूर्ण हड़ताल और चक्का जाम रहेगा। इसी दौरान मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के आवास के बाहर धरना दिया जाएगा, जबकि विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मुख्यमंत्री आवास के बाहर भूख हड़ताल की जाएगी।
यूनियन ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कर्मचारियों की मांगें जल्द नहीं मानी गईं और आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मामलों को वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन कर दिया जाएगा। इसके साथ ही सरकार की राजनीतिक रैलियों के बहिष्कार का भी ऐलान किया गया है।