चंडीगढ़, 2 जुलाई
पंजाब में मानसून की पहली जोरदार बारिश ने भीषण गर्मी से राहत देने के साथ-साथ बिजली व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को भी काफी हद तक कम कर दिया है। बुधवार तक जहां राज्य में बिजली की अधिकतम मांग 17,000 मेगावाट से अधिक बनी हुई थी, वहीं गुरुवार सुबह रातभर हुई बारिश के बाद यह घटकर करीब 8,000 मेगावाट रह गई। मांग में आई इस भारी गिरावट से पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले कई दिनों से बढ़ती बिजली खपत को पूरा करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहा था।
PSPCL के अधिकारियों के अनुसार दिन के समय बिजली की मांग में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन इसके दोबारा हाल के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की संभावना फिलहाल नहीं है। पिछले दिनों बढ़ती मांग के कारण राज्य के कई हिस्सों में बिजली कटौती करनी पड़ी थी, जिससे किसानों और उद्योग जगत दोनों में नाराजगी देखने को मिली थी।
धान की रोपाई के महत्वपूर्ण दौर में किसानों ने अनियमित बिजली आपूर्ति को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया था। उनका कहना था कि पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से सिंचाई प्रभावित हो रही है और फसलों पर असर पड़ रहा है। वहीं, उद्योगों ने भी बिजली की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित होने की शिकायत दर्ज कराई थी।
बुधवार को पंजाब में अधिकतम बिजली मांग 17,008 मेगावाट दर्ज की गई थी। उस समय राज्य को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए केंद्रीय ग्रिड से लगभग 11,000 मेगावाट बिजली लेनी पड़ रही थी, जबकि राज्य का अपना बिजली उत्पादन भी पूरी क्षमता के साथ दबाव में काम कर रहा था।
इस बीच, 29 जून को PSPCL ने एक दिन में 3,862 लाख यूनिट बिजली आपूर्ति कर नया रिकॉर्ड बनाया था। यह निगम के इतिहास में अब तक की सबसे अधिक दैनिक बिजली आपूर्ति रही। इससे पहले 5 जुलाई 2025 को 3,546 लाख यूनिट बिजली आपूर्ति का रिकॉर्ड बना था, जब राज्य की सभी ताप विद्युत इकाइयां संचालित हो रही थीं।
हालांकि यह उपलब्धि तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण रही, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इससे बिजली व्यवस्था अपनी अधिकतम क्षमता के करीब पहुंच गई थी। केंद्रीय ग्रिड से अत्यधिक बिजली लेने के कारण ट्रांसमिशन नेटवर्क पर दबाव बढ़ गया था। ऐसी स्थिति में यदि लोड निर्धारित सुरक्षा सीमा से अधिक हो जाए तो व्यापक ग्रिड फेल होने से बचाने के लिए स्थानीय स्तर पर बिना पूर्व सूचना के बिजली कटौती करनी पड़ती है।
पंजाब में जून और जुलाई धान की रोपाई का सबसे अहम समय माना जाता है। राज्य में लगभग 35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती है। इस दौरान सिंचाई के लिए बड़ी संख्या में कृषि ट्यूबवेल एक साथ संचालित होते हैं, जिससे बिजली की मांग में स्वाभाविक रूप से तेज वृद्धि होती है। इसके अलावा जून के अंतिम सप्ताह में तापमान करीब 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। भीषण गर्मी के चलते घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों में एयर कंडीशनर तथा अन्य शीतलन उपकरणों का उपयोग बढ़ने से बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी।
अब मानसून की बारिश के बाद पटियाला, लुधियाना, अमृतसर, फरीदकोट, जालंधर और बठिंडा समेत राज्य के अधिकांश जिलों में तापमान घटकर 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच आ गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में मानसून और सक्रिय होगा, जिससे तापमान में और गिरावट आएगी, एयर कंडीशनर का उपयोग कम होगा तथा खेतों को प्राकृतिक सिंचाई मिलेगी। इससे बिजली ग्रिड पर पड़ रहा दबाव और कम होने की संभावना जताई जा रही है।