नई दिल्ली, 7 जुलाई
भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को नई मजबूती देने की दिशा में सोमवार को कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा, डिजिटल भुगतान, चुनावी तकनीक, कृषि, खनिज और सांस्कृतिक सहयोग सहित अनेक अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद दोनों देशों ने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिन्हें भविष्य की रणनीतिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वार्ता के दौरान चुनावी तकनीक के क्षेत्र में सहयोग पर विशेष सहमति बनी। दोनों देशों ने भारतीय तकनीक पर आधारित, इंडोनेशिया की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित की जाने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के निर्यात के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। सूत्रों के अनुसार भारत इंडोनेशिया के लिए विशेष ईवीएम विकसित करने में तकनीकी सहयोग देगा, जिसे भारतीय चुनाव प्रबंधन प्रणाली पर बढ़ते वैश्विक भरोसे का संकेत माना जा रहा है।
रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। भारत की स्वदेशी मिसाइल तकनीक में बढ़ती रुचि के बीच इंडोनेशिया ने भारतीय अस्त्र हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के आयात का निर्णय लिया है। साथ ही ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली के अपने भंडार का विस्तार करने की योजना के तहत भारत अतिरिक्त मिसाइल बैटरियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहयोग करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में मजबूत और विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला बेहद महत्वपूर्ण है। इसी दिशा में दोनों देशों ने इस्पात, महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ-पृथ्वी संसाधनों से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। स्टेनलेस स्टील और दुर्लभ-पृथ्वी चुंबकों के निर्माण को लेकर दोनों देशों की कंपनियों के बीच नई साझेदारियां स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) प्रणाली को इंडोनेशिया की डिजिटल भुगतान व्यवस्था के साथ जोड़ने का भी निर्णय लिया गया है, जिससे व्यापारिक लेनदेन और दोनों देशों के नागरिकों की यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सकेगी।
संयुक्त वक्तव्य के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस वर्ष को ‘टैगोर–देवान्तारा सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कूटनीति वर्ष’ के रूप में मनाएंगे। उन्होंने बताया कि इंडोनेशिया के प्रथम शिक्षा मंत्री की हजर देवान्तारा के शिक्षा संबंधी विचार गुरुदेव टैगोर के दर्शन से गहराई से प्रभावित थे, जो दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि बुधवार को राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता स्थित एक हजार वर्ष से अधिक पुराने प्रंबानन मंदिर के संरक्षण परियोजना का शुभारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मंदिर भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का जीवंत प्रतीक है। दोनों देशों ने यह भी तय किया है कि महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के उद्देश्य से भारत इंडोनेशिया में स्टील, निकल तथा दुर्लभ-पृथ्वी स्थायी चुंबकों के निर्माण से जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ाएगा।