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पीएम को अपशब्द कहने वाली नाबालिग का वायरल माफीनामा, क्या सच में बदल गई कहानी?

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Published On: August 1, 2026

नई दिल्ली, 01 अगस्त

जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाली एक नाबालिग लड़की का माफी मांगने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। वीडियो सामने आने के बाद पूरे मामले को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

वायरल वीडियो में लड़की अपने बयान पर खेद व्यक्त करती दिखाई दे रही है। वह कहती है कि वह दिल्ली के कनॉट प्लेस में चल रहे प्रदर्शन के दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों के प्रभाव में आ गई थी। उसके अनुसार, प्रदर्शन में शामिल कई लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगा रहे थे और उसी माहौल में उसने भी अनुचित शब्दों का इस्तेमाल कर दिया।

वीडियो में लड़की खुद को 15 वर्ष की नाबालिग बताते हुए कहती है कि वह अपने दोस्तों के साथ प्रदर्शन स्थल पर गई थी। वहां का माहौल देखकर वह बहक गई और उसने ऐसी बातें कह दीं, जिन पर अब उसे गहरा पछतावा है। उसने कहा कि उससे बड़ी गलती हुई है, जिसके लिए वह पूरे देश से माफी मांगती है। लड़की ने यह भी कहा कि यह उसकी पहली और आखिरी गलती है तथा भविष्य में वह कभी इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं करेगी और न ही इस प्रकार की कोई पोस्ट साझा करेगी। उसने अपने किए पर शर्मिंदगी जताते हुए लोगों से उसे माफ करने की अपील की।

यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब इससे कुछ घंटे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो संदेश में इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को माफ करने की बात कही और समाज से भी अपील की कि ऐसे बच्चों को दंडित करने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास किया जाए।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, उसे पूरे देश और दुनिया ने देखा। उन्होंने कहा कि कुछ शरारती बच्चों ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जो किसी भी सभ्य समाज के अनुरूप नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उन बच्चों ने उनके साथ-साथ उनकी दिवंगत मां के बारे में भी अपमानजनक टिप्पणियां कीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बचपन और युवावस्था वह दौर होता है, जब इंसान से गलतियां हो जाती हैं और इन्हीं गलतियों से सीखने का अवसर भी मिलता है। उन्होंने कहा कि वह उन बच्चों को माफ करना चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि समाज भी उनकी इस भावना को समझेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार जीभ गलती से दांतों के बीच आ जाती है और उससे खून भी निकल सकता है, लेकिन कोई अपने दांत नहीं तोड़ता क्योंकि दांत और जीभ दोनों अपने ही होते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि उसी तरह ये बच्चे भी हमारे अपने हैं। यदि वे गुमराह हो गए हैं तो उन्हें सही रास्ता दिखाना समाज की जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, ऐसे बच्चों को सजा दिलाना, अदालतों के चक्कर लगवाना या उनके परिवारों को परेशान करना किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि उन्हें समझाकर बेहतर नागरिक बनाना ही सबसे उचित रास्ता है। वहीं, लड़की के कथित माफीनामे वाले वीडियो की सत्यता को लेकर अब भी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।

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