नई दिल्ली, 14 जून
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव इस साल नवंबर–दिसंबर में कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके पीछे मुख्य वजह अगले साल फरवरी में प्रस्तावित जनगणना के दूसरे चरण को बताया जा रहा है, जिसे बाधित होने से बचाने के लिए केंद्र सरकार इन राज्यों में निर्धारित समय से पहले चुनाव कराने पर विचार कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में भाजपा नेतृत्व ने संबंधित राज्यों की इकाइयों को सतर्क कर दिया है और सभी तैयारियां इसी महीने के भीतर अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, उत्तराखंड को इस संभावित जल्द चुनाव से कुछ राहत मिल सकती है।
दरअसल, जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 के आसपास प्रस्तावित है, जिसमें 9 से 28 फरवरी के बीच बड़े पैमाने पर सरकारी कर्मचारियों की तैनाती होगी। इसी दौरान चुनाव होने पर प्रशासनिक संसाधनों और कर्मचारियों की भारी कमी सामने आ सकती है। अकेले उत्तर प्रदेश में लगभग 5.5 लाख, पंजाब में करीब 2 लाख तथा उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में लगभग 50-50 हजार कर्मचारियों की जरूरत जनगणना कार्य के लिए होगी।
चुनाव आयोग के सूत्रों ने फिलहाल सरकार की ओर से इस तरह के किसी औपचारिक प्रस्ताव की पुष्टि नहीं की है। हालांकि यह जरूर कहा गया है कि यदि नवंबर में चुनाव होते हैं तो मतदाता सूची को लेकर कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी, क्योंकि एसआईआर प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जरूरत पड़ने पर अंतिम सूची समय से पहले तैयार की जा सकती है।
उधर, भाजपा की राज्य इकाइयों से जुड़े सूत्रों ने भी जल्द चुनाव की चर्चाओं की पुष्टि की है। बताया गया है कि संगठन को बूथ स्तर तक तैयारियों को तेज करने, नियुक्तियां पूरी करने और चुनावी रणनीति को जुलाई के पहले सप्ताह तक अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए हैं।
इस बीच राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। विपक्षी इंडिया गठबंधन की हालिया बैठक में इस संभावित चुनावी बदलाव को लेकर चर्चा हुई, जहां समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच भी इस मुद्दे पर बातचीत होने की बात सामने आई है।