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WhatsApp का नया फीचर अभी नहीं होगा लॉन्च, जानें कारण

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Published On: July 13, 2026

नई दिल्ली, 13 जुलाई

व्हाट्सऐप का बहुप्रतीक्षित यूजरनेम फीचर फिलहाल लॉन्च नहीं किया जाएगा। व्हाट्सऐप की मूल कंपनी मेटा ने केंद्र सरकार को आश्वासन दिया है कि सरकार के साथ इस मुद्दे पर बातचीत पूरी होने तक इस फीचर को जारी नहीं किया जाएगा। सूत्रों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, मेटा इस संबंध में सरकार को अपना लिखित जवाब भी सौंप चुकी है, जिसकी फिलहाल समीक्षा की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक मेटा ने अपने जवाब में यह स्पष्ट किया है कि वह यूजरनेम फीचर क्यों शुरू करना चाहती है और इससे उपयोगकर्ताओं को क्या लाभ मिलेंगे। साथ ही कंपनी ने ऑनलाइन सुरक्षा और साइबर अपराधों को लेकर सरकार द्वारा उठाई गई चिंताओं पर भी अपना पक्ष रखा है। अब सरकार मेटा के जवाब का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगी।

व्हाट्सऐप ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वह वर्ष के अंत तक यूजरनेम फीचर लॉन्च करने की योजना बना रही है। इस सुविधा के तहत प्रत्येक उपयोगकर्ता अपने लिए एक विशिष्ट यूजरनेम बना सकेगा, जिसे संपर्क के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे लोगों को किसी से बातचीत करने के लिए अपना मोबाइल नंबर साझा करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह फीचर टेलीग्राम और सिग्नल जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर पहले से उपलब्ध व्यवस्था के समान माना जा रहा है।

हालांकि, सरकार ने इस फीचर को लेकर सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं जताई हैं। आशंका है कि धोखेबाज मिलते-जुलते या भ्रामक यूजरनेम बनाकर लोगों को गुमराह कर सकते हैं और साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं। सरकार का मानना है कि यदि पहचान की पर्याप्त व्यवस्था नहीं रही तो ऐसे मामलों में वृद्धि हो सकती है।

यह फीचर उस समय भी चर्चा में आया था जब कई प्रसिद्ध हस्तियों ने दावा किया कि उन्हें अपने नाम से जुड़े यूजरनेम उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। इसके जवाब में मेटा ने कहा था कि चर्चित व्यक्तियों के नाम पहले से सुरक्षित कर दिए गए हैं, ताकि कोई अन्य व्यक्ति उनका दुरुपयोग न कर सके। हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे दावे भी सामने आए, जिनमें लोगों ने कहा कि वे प्रसिद्ध नामों से जुड़े यूजरनेम हासिल करने में सफल रहे।

केंद्र सरकार ने 1 जुलाई को मेटा को नोटिस जारी कर इस फीचर के रोलआउट पर रोक लगाने को कहा था। सरकार का मानना है कि यूजरनेम प्रणाली का दुरुपयोग कर साइबर अपराधी अपनी वास्तविक पहचान और मोबाइल नंबर छिपाकर फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट जैसी ऑनलाइन ठगी और अन्य साइबर अपराधों को अधिक आसानी से अंजाम दे सकते हैं। ऐसे में सरकार सुरक्षा संबंधी पहलुओं की संतुष्टि के बाद ही इस फीचर को आगे बढ़ाने के पक्ष में है।

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