चंडीगढ़, 9 जुलाई
पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से चल रही अंदरूनी खींचतान फिलहाल शांत होती नजर आ रही है। पार्टी हाईकमान के सख्त रुख के बाद नाराज नेताओं के तेवर नरम पड़ गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस को एकजुट रखना ही सभी नेताओं की प्राथमिकता है और पार्टी हाईकमान जो भी रणनीति तय करेगा, सभी नेता मिलकर उसी दिशा में काम करेंगे।
चंडीगढ़ में अपने समर्थकों के साथ बैठक के बाद चन्नी ने कहा कि संगठन की मजबूती और पार्टी की एकता सबसे महत्वपूर्ण है। इससे पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने चरणजीत चन्नी से फोन पर बातचीत की थी। इसके बाद चन्नी ने अपने समर्थकों की बैठक बुलाई। वहीं पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल भी नाराज नेताओं को मनाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। उन्होंने पूर्व मंत्री ब्रह्म महेंद्र से मुलाकात कर संगठन में एकजुटता बनाए रखने पर चर्चा की। बघेल ने भरोसा जताया कि पार्टी हाईकमान अपने फैसले में बदलाव नहीं करेगा, लेकिन जल्द ही सभी नाराज नेता एक मंच पर दिखाई देंगे।
चन्नी समर्थक और कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने भी पार्टी की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि मौजूदा समय में पंजाब में किसी तरह का राजनीतिक प्रयोग करने की जरूरत नहीं है। उनका इशारा हाल ही में कांग्रेस हाईकमान द्वारा नियुक्त किए गए तीन नए कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्षों की ओर था। उन्होंने कहा कि मतभेद किसी भी लोकतांत्रिक दल का हिस्सा होते हैं, लेकिन अंतिम उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और पंजाब में आम आदमी पार्टी तथा भारतीय जनता पार्टी की रणनीतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करना है।
परगट सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचार होना स्वाभाविक है और सभी पक्षों की बात हाईकमान तक पहुंचा दी गई है। उन्होंने कहा कि पंजाब इस समय कानून-व्यवस्था समेत कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राज्य की छवि प्रभावित हुई है। ऐसे में कांग्रेस का लक्ष्य प्रदेश के हितों को प्राथमिकता देते हुए मजबूती से जनता के बीच जाना और विपक्ष की भूमिका निभाना है।
इस बीच पंजाब कांग्रेस के भीतर जारी घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी ने भी निशाना साधा है। भाजपा के राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने कहा कि भूपेश बघेल का बयान कांग्रेस की अंदरूनी कार्यप्रणाली, वंशवादी राजनीति और नेतृत्व शैली को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी-नेहरू परिवार ने लंबे समय तक पंजाब की राजनीति को अपने हितों के अनुसार चलाया और राज्य के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर कांग्रेस की भूमिका हमेशा विवादों में रही है। चुघ ने कहा कि पंजाबी सूबा, 1984 के सिख विरोधी दंगे, पंजाब के पानी के बंटवारे और चंडीगढ़ जैसे मुद्दों पर कांग्रेस का इतिहास राज्य के हितों के अनुरूप नहीं रहा।