काराकास, 26 जून
वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के 30 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रभावित इलाकों में बचाव दल मलबा हटाकर जीवित लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। अब तक इस भीषण आपदा में 235 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4300 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग अब भी मलबे में दबे हो सकते हैं, जिससे मृतकों की संख्या में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है।
भूकंप का सबसे अधिक असर राजधानी काराकास और तटीय क्षेत्र ला गुआइरा में देखा गया है, जहां कई बहुमंजिला इमारतें पूरी तरह जमींदोज हो गई हैं। राहत एजेंसियां दिन-रात मलबा हटाने के साथ-साथ फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास कर रही हैं। घटनास्थल से सामने आ रही तस्वीरों में घायल बच्चों, बेघर परिवारों और मलबे में फंसे पालतू पशुओं का दर्दनाक मंजर दिखाई दे रहा है।
आपदा के बाद देश की कार्यवाहक राष्ट्रपति रोड्रिगेज ने पूरे देश में आपातकाल की घोषणा कर दी है। उन्होंने राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि मौजूदा राजनीतिक हालात बचाव अभियान के सामने अतिरिक्त चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। इसी वर्ष जनवरी में तत्कालीन राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद रोड्रिगेज ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला था। राजनीतिक अस्थिरता के कारण प्रशासन के लिए राहत कार्यों का समन्वय करना आसान नहीं माना जा रहा है।
वेनेजुएला को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी लगातार सहायता मिल रही है। भारत, अमेरिका, फ्रांस सहित कई देशों ने हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूकंप के तुरंत बाद संवेदना व्यक्त करते हुए कहा था कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला की हरसंभव सहायता के लिए तैयार है। वहीं ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर प्रसिद्ध सैंड आर्ट कलाकार पद्मश्री सुदर्शन पटनायक ने रेत की कलाकृति बनाकर भूकंप पीड़ितों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि और संवेदना प्रकट की।
भूकंप के झटकों का असर पड़ोसी क्षेत्रों तक महसूस किया गया है। ब्राजील के अमेजन क्षेत्र में भी एहतियात के तौर पर कई इमारतों को खाली कराया गया है। राहत अधिकारियों के अनुसार प्रभावित इलाकों में हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं और बचाव अभियान पूरी क्षमता के साथ जारी है। वर्ष 1999 में भी वेनेजुएला भीषण भूस्खलन की त्रासदी झेल चुका है, जिसे देश के इतिहास की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है। मौजूदा भूकंप ने एक बार फिर देश को गहरे संकट में डाल दिया है।