पुरी, 16 जुलाई
भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का शुभारंभ गुरुवार को गहरी आस्था और पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों के बीच हुआ। ओडिशा के पुरी में लगातार हो रही बारिश भी श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर सकी। भारी वर्षा के बीच महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा को पारंपरिक पाहंडी अनुष्ठान के तहत गर्भगृह से बाहर लाया गया, जहां लाखों श्रद्धालु उनके दिव्य दर्शन के साक्षी बने।
परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान सुदर्शन को मंदिर से बाहर लाया गया। इसके बाद भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ को उनके भव्य रथों तालध्वज, दर्पदलन और नंदीघोष तक पहुंचाया गया। रथों पर विराजमान होने से पहले तीनों देवताओं ने नए रथों की परिक्रमा की और रथ बीजे अनुष्ठान के बाद उन्हें सिंहासन पर स्थापित किया गया। इसके बाद गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने विशेष पूजा-अर्चना की, जबकि पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने पारंपरिक छेरा पहंरा अनुष्ठान के तहत स्वर्ण जड़ित झाड़ू से तीनों रथों की प्रतीकात्मक सफाई कर सुगंधित पवित्र जल का छिड़काव किया। सभी धार्मिक अनुष्ठानों के पूर्ण होने और रथों में लकड़ी के घोड़े जोड़े जाने के बाद श्रद्धालुओं ने रथ खींचने की तैयारी शुरू कर दी। परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ, उसके बाद देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ और अंत में भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेगा।
लगातार हो रही भारी बारिश के बावजूद पुरी में करीब दो लाख श्रद्धालु पहले ही पहुंच चुके हैं। मौसम विभाग ने क्षेत्र में भारी बारिश और गरज-चमक की चेतावनी जारी की है। रथ यात्रा की पूर्व संध्या पर पुरी में 143.8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जिसके कारण प्रशासन ने ग्रैंड रोड पर जलभराव से निपटने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर से लगभग 2.6 किलोमीटर दूर स्थित श्री गुंडिचा मंदिर तक रथ यात्रा बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।
रथ यात्रा के पावन अवसर पर प्रसिद्ध रेत कलाकार और पद्मश्री सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने पुरी बीच पर अपनी अनूठी कला के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने समुद्र तट की रेत पर भगवान जगन्नाथ की विशाल आकृति के साथ 100 लघु रेत के रथ तैयार किए। उनकी इस मनमोहक कलाकृति ने रथ यात्रा की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को जीवंत कर दिया तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रथ यात्रा के अवसर पर कहा कि यह दिन अत्यंत पावन और ऐतिहासिक है, जब स्वयं महाप्रभु अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए मंदिर से बाहर आते हैं। उन्होंने कहा कि वह भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के साथ-साथ गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य का आशीर्वाद भी लेंगे। उन्होंने महाप्रभु से ओडिशा, पूरे देश, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सभी देशवासियों के सुख, समृद्धि तथा कल्याण की कामना की और प्रार्थना की कि भारत निरंतर प्रगति करता रहे तथा विश्व का मार्गदर्शन करने वाला राष्ट्र बने।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी रथ यात्रा के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्रद्धा, भक्ति और आस्था से परिपूर्ण यह महापर्व पूरे देश में सद्भाव, सुख, शांति और समृद्धि का संदेश लेकर आए।
उधर गुजरात के अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की 149वीं रथ यात्रा भी गुरुवार सुबह पारंपरिक रीति-रिवाजों और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पारंपरिक ‘पाहिंद विधि’ निभाते हुए भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों के आगे स्वर्ण झाड़ू से मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई कर यात्रा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्य के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी इस भव्य शोभायात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीनों रथों के साथ 18 सजे-धजे हाथी, लगभग 100 आकर्षक झांकियां, 30 अखाड़े, विभिन्न धार्मिक मंडलियां और 20 से अधिक भजन मंडलियां शामिल हैं। यात्रा को सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए लगभग 30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। सुरक्षा व्यवस्था में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अलावा राज्य रिजर्व पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स, सीमा सुरक्षा बल और चेतक कमांडो की विशेष टीमें भी शामिल हैं। यात्रा मार्ग पर हजारों सीसीटीवी कैमरों, 100 से अधिक ड्रोन, सैकड़ों निगरानी प्वाइंट और एआई आधारित वीडियो एनालिटिक्स के जरिए लगातार नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही फेस रिकग्निशन तकनीक और एंटी-ड्रोन जैमिंग सिस्टम का भी उपयोग किया जा रहा है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी रथ यात्रा के अवसर पर देश और विदेश में बसे भगवान जगन्नाथ के सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पवित्र परंपरा भगवान और भक्तों के मिलन का अद्भुत प्रतीक है तथा महाप्रभु श्री जगन्नाथ की कृपा से देश और देशवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि निरंतर बढ़ती रहे, यही उनकी कामना है।