चंडीगढ़, 7 जुलाई।
पंजाब में आगामी 12 जुलाई तक मौसम का मिजाज बदला रहने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। विभाग का अनुमान है कि लगातार होने वाली वर्षा के कारण अधिकतम तापमान में करीब पांच डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। फिलहाल भी प्रदेश का तापमान सामान्य से लगभग 2.1 डिग्री कम बना हुआ है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिली है।
सोमवार को पंजाब के विभिन्न जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। इस दौरान राज्य के औसत तापमान में 1.7 डिग्री सेल्सियस की कमी आई। बठिंडा सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 39.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं पटियाला में 25.2 मिलीमीटर, मोहाली में 18 मिलीमीटर, लुधियाना में 2.2 मिलीमीटर, पठानकोट में 0.4 मिलीमीटर और होशियारपुर में 0.5 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई।
मौसम विभाग के अनुसार 10 जुलाई तक कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी रहेगी, जबकि 11 और 12 जुलाई को कई इलाकों में भारी वर्षा हो सकती है। इसे मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने का संकेत माना जा रहा है। इससे खेती-किसानी के साथ-साथ गर्मी से परेशान लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
राज्य के न्यूनतम तापमान में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह सामान्य स्तर के आसपास बना हुआ है। सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस पठानकोट में रिकॉर्ड किया गया। अमृतसर में अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री, लुधियाना में 33.8 डिग्री, पटियाला में 32.7 डिग्री, रूपनगर में 28.8 डिग्री और बठिंडा में न्यूनतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
इस बीच उमस भरे मौसम के साथ राज्य में बिजली संकट भी गहराता जा रहा है। रणजीत सागर बांध की सभी चार इकाइयों और रोपड़ थर्मल प्लांट की छह नंबर यूनिट बंद होने से कुल 810 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। उत्पादन में आई इस कमी के चलते कई इलाकों में अघोषित बिजली कट लगाए जा रहे हैं, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
सोमवार को पंजाब में बिजली की अधिकतम मांग 16,307 मेगावाट तक पहुंच गई, जबकि पावरकॉम के पास अपने स्रोतों से केवल 4,969 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी। मांग पूरी करने के लिए निगम को उत्तरी ग्रिड से लगभग 10,600 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। इसके बावजूद रविवार रात कई फीडरों पर करीब डेढ़ घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही, जिससे उमस भरी गर्मी में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
हालांकि बीते कुछ दिनों में बारिश के कारण बिजली की मांग में कमी आई है। एक जुलाई को राज्य में अधिकतम मांग 17,112 मेगावाट दर्ज की गई थी, जो दो जुलाई को घटकर 15,682 मेगावाट रह गई। इसके बावजूद उत्पादन में कमी के कारण उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। सोमवार को उपलब्ध 4,969 मेगावाट बिजली में सरकारी थर्मल संयंत्रों से 1,643 मेगावाट, जलविद्युत परियोजनाओं से 449 मेगावाट और निजी थर्मल प्लांटों से 2,775 मेगावाट बिजली प्राप्त हुई। अधिकारियों का कहना है कि उत्पादन इकाइयों के बंद रहने से फिलहाल बिजली आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।