चंडीगढ़, 14 जुलाई
पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी कलह के बीच पार्टी हाईकमान ने बड़ा कदम उठाया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पार्टी के नाराज गुट के नेताओं को 16 और 17 जुलाई को दिल्ली में बैठक के लिए बुलाया है। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में बढ़ते मतभेदों को खत्म करने और संगठन को एकजुट करने के उद्देश्य से यह अहम बैठक बुलाई गई है।
सूत्रों के अनुसार पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने राज्य में बागी नेताओं से मुलाकात के बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को सौंप दी थी। रिपोर्ट मिलने के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए मंगलवार को कांग्रेस नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने पंजाब कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में निर्णय लिया गया कि नाराज नेताओं को दिल्ली बुलाकर उनकी बात सुनी जाएगी और विवाद का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक खींचतान का असर चुनावी तैयारियों पर पड़े।
इससे पहले 6 जुलाई को पार्टी हाईकमान ने विवाद सुलझाने के लिए भूपेश बघेल को चंडीगढ़ भेजा था। वह 11 जुलाई तक वहां रहे और इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई नाराज नेताओं से अलग-अलग मुलाकातें कीं। उन्होंने नाश्ते, दोपहर और रात्रिभोज के दौरान नेताओं के साथ अनौपचारिक चर्चा करने के अलावा कई नेताओं से व्यक्तिगत स्तर पर भी बातचीत की और उनकी नाराजगी के कारणों को समझा।
दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात के निमंत्रण के बाद बागी गुट भी सक्रिय हो गया है। बताया जा रहा है कि बैठक से पहले नेता आपस में विचार-विमर्श कर अपनी रणनीति तय करेंगे, ताकि हाईकमान के सामने अपनी बात मजबूती से रख सकें।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बदलने और विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने जैसे मुद्दों पर हाईकमान अपने पहले से तय रुख में बदलाव के पक्ष में नहीं है। कांग्रेस फिलहाल पंजाब में अपना सीधा मुकाबला आम आदमी पार्टी से मान रही है और भाजपा को प्रमुख चुनौती के रूप में नहीं देख रही। पार्टी की रणनीति सामूहिक नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ने की है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव प्रचार की कमान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी संभालेंगे। ऐसे में हाईकमान अब सभी पक्षों को साथ लेकर विवाद का व्यावहारिक समाधान निकालने की कोशिश में जुट गया है।