चंडीगढ़, 3 जुलाई
पंजाब कांग्रेस में हाल ही में हुए संगठनात्मक फेरबदल के बाद असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में नेता और कार्यकर्ता सुबह से ही उनके चमकौर साहिब स्थित आवास पर पहुंचने लगे। इस दौरान कई नेताओं ने पार्टी हाईकमान के उस फैसले पर नाराजगी जताई, जिसमें अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाए रखा गया है।
राजनीतिक जानकार इस घटनाक्रम को कांग्रेस नेतृत्व के फैसले के खिलाफ पहला खुला विरोध मान रहे हैं। चन्नी के आवास पर पहुंचे नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना था कि उन्हें उम्मीद थी कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी संगठन की कमान चरणजीत सिंह चन्नी को सौंपी जाएगी। उनका मानना है कि चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने से कांग्रेस को चुनावी मुकाबले में मजबूती मिलती और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा होता।
हालांकि, अब तक चरणजीत सिंह चन्नी ने संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। उनके समर्थन में पहुंचे नेताओं में पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु और ओपी सोनी भी शामिल रहे। मीडिया से बातचीत में दोनों नेताओं ने कहा कि वे चन्नी से मुलाकात करने आए हैं और पार्टी के भविष्य को लेकर उनके मार्गदर्शन तथा निर्देशों के अनुसार आगे की रणनीति तय करेंगे।
बैठक में मौजूद कई पूर्व विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली जननेताओं में से एक हैं। उनका कहना था कि यदि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता तो पार्टी विभिन्न वर्गों के बीच अपना जनाधार और अधिक मजबूत कर सकती थी तथा चुनावी तैयारियों को नई गति मिलती।
हालांकि नेताओं ने सीधे तौर पर पार्टी हाईकमान की आलोचना करने से परहेज किया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि हालिया फैसले से कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग निराश हुआ है। उनका मानना है कि सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ प्रभावी चुनावी अभियान चलाने के लिए कांग्रेस को ऐसे नेता की जरूरत है, जिसकी जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ हो और यह भूमिका चरणजीत सिंह चन्नी बेहतर ढंग से निभा सकते हैं। नेताओं ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में चन्नी का कार्यकाल और आम कार्यकर्ताओं से उनका सीधा जुड़ाव उन्हें संगठन का स्वाभाविक चेहरा बनाता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और एकजुटता का संदेश देने की कोशिश में जुटी है। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने अब तक इस असंतोष पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
सूत्रों के अनुसार चरणजीत सिंह चन्नी शुक्रवार शाम अपने समर्थकों को संबोधित कर इस पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रख सकते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कांग्रेस हाईकमान नाराज नेताओं से बातचीत कर संगठनात्मक मतभेदों को बढ़ने से रोकने की दिशा में कोई पहल करता है।