नई दिल्ली, 15 जुलाई
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। उनकी लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए अदालत में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें उनकी जान बचाने के लिए जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराकर फोर्स-फीडिंग कराने की मांग की गई है।
यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी ने दाखिल की है। याचिका में केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि सोनम वांगचुक को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया जाए और यदि उनकी जान पर खतरा हो तो चिकित्सकीय निगरानी में उन्हें जबरन भोजन उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, वकीलों की हड़ताल के कारण केंद्र सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई फिलहाल स्थगित कर दी।
सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे हैं। वह कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक के समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं। पार्टी की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि मई में हुई परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ और इसी मुद्दे को लेकर यह विरोध प्रदर्शन जारी है।
इस बीच वांगचुक की सेहत लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उनका शरीर तेजी से कमजोर हो रहा है, उन्हें मांसपेशियों में दर्द की शिकायत है और अब तक उनका लगभग 8.5 किलोग्राम वजन कम हो चुका है। उनका ब्लड प्रेशर 109/70 दर्ज किया गया है। बड़ी संख्या में समर्थक उनसे अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल वह अपने निर्णय पर कायम हैं।