नई दिल्ली, जुलाई 22
राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न राजनीतिक दलों के जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला लिया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कुल 24 अतिरिक्त कंपनियों को दिल्ली में तैनात किया गया है। ये सभी कंपनियां दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगी। सरकार ने संकेत दिया है कि किसी भी तरह की हिंसा या कानून व्यवस्था भंग करने की कोशिश पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा के मद्देनजर बुधवार को नई दिल्ली के 16 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया, ताकि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा प्रबंधन में किसी तरह की परेशानी न हो। प्रशासन का कहना है कि हालात सामान्य होने के बाद ही इन स्टेशनों पर सेवाएं दोबारा शुरू की जाएंगी।
सूत्रों के अनुसार, पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी है। बीते दो दिनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनावपूर्ण स्थिति भी देखने को मिली। इस दौरान वाहनों में तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आने का दावा किया गया। मंगलवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य सांसद अचानक सात, लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गईं।
प्रधानमंत्री आवास की सुरक्षा को देखते हुए वहां तैनात सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ा दी गई। खतरे के आकलन के आधार पर स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के अतिरिक्त कमांडो भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाए गए और प्रधानमंत्री आवास के बाहरी सुरक्षा घेरे को पहले से अधिक मजबूत किया गया।
इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने साफ किया है कि उसका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। वहीं कई विपक्षी दल भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। ऐसे हालात में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विभिन्न राज्यों से अतिरिक्त सुरक्षा बलों को दिल्ली बुलाया गया है। सूत्रों के मुताबिक सीआरपीएफ की नौ कंपनियां छत्तीसगढ़, तीन कंपनियां झारखंड, पांच कंपनियां मध्य प्रदेश और एक कंपनी ओडिशा से दिल्ली भेजी गई हैं। इसके अलावा आरएएफ के पश्चिमी सेक्टर से चार और दक्षिणी सेक्टर से दो कंपनियां भी राजधानी पहुंच चुकी हैं, जिन्हें जरूरत के अनुसार संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा।